सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार के खिलाफ याचिका पर पूरी की सुनवाई…

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने व्यभिचार को अपराध की श्रेणी में रखने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुनवाई पूरी कर ली है। न्यायालय का कहना है कि वह इस मामले में फैसला बाद में सुनायेगा।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पिंकी आनंद की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जायेगा।

संविधान पीठ ने धारा 497 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर छह दिन सुनवाई की। केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि व्याभिचार अपराध है क्योंकि इससे विवाह और परिवार बर्बाद होते हैं।

उन्होंने कहा कि विवाह की एक संस्था के रूप में पवित्रता को ध्यान में रखते हुये ही व्याभिचार को अपराध की श्रेणी में रखा गया है। सुनवाई के दौरान पीठ ने केन्द्र से जानना चाहा कि व्याभिचार संबंधी कानूनी प्रावधान से जनता की क्या भलाई है क्योंकि इसमें यह व्यवस्था है कि यदि स्त्री के विवाहेत्तर संबंधों को उसके पति की सहमति हो तो यह अपराध नहीं होगा।

 

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