निर्भया केस: नाबालिग दोषी की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट करेगा सोमवार को सुनवाई

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Supreme_Court_494291f-300x199नई दिल्ली। दिल्‍ली के निर्भया गैंगरेप कांड में बीती रात एक नया मोड़ आया। इसमें नाबालिग दोषी की रिहाई को लेकर दिल्‍ली महिला आयोग की अध्‍यक्ष स्‍वाति मालीवाल ने आधी रात को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के यहां विशेष अनुमति याचिका दायर कर ना‍बालिग दोषी की रिहाई पर रोक लगाने की मांग की।

मां ने कहा दिखावा कर रहा महिला आयोग

रिहाई से पहले बीती रात हुए ड्रामे पर निर्भया की मां आशा देवी ने दिल्ली महिला आयोग अध्यक्ष स्वाति मालीवाल पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। आशा देवी ने कहा कि अगर उन्हें कोर्ट जाना ही था तो दिन में जाती। अगर वो दिन में जातीं तो शायद रिहाई पर रोक लगाई जा सकती थी। उन्होंने आगे कहा कि नाबालिग रिहा हो ही जाएगा तो सोमवार को सुनवाई से क्या मिलेगा। मुझे न्याय चाहिए, उसकी रिहाई पर रोक लगे, मैं इसके सिवा कुछ नहीं जानती।

21 दिसंबर को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

इसके बाद आधी रात में ही चीफ जस्टिस ने दिल्ली महिला आयोग की याचिका को जस्टिस आर्दश कुमार गोयल और जस्टिस उदय ललित की वेकेशन बेंच के पास भेज दिया। लेकिन वेकेशन बेंच ने मामले पर तुरंत सुनवाई करने के बजाए सोमवार 21 दिसंबर को सुनवाई करने का फैसला किया।

हाईकोर्ट का फैसला बरकरार

हालांकि कोर्ट ने नाबालिग की रिहाई पर कोई रोक नहीं लगाई है। लेकिन दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल सरकार और दिल्ली पुलिस से सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक नाबालिग की रिहाई रोकने की मांग की है।

क्‍या बोलीं स्‍वाति मालीवाल

इसको लेकर स्वाति मालीवाल ने कहा कि मामले की सुनवाई सोमवार को आइटम नंबर 3 के तौर पर होगी। मामला अब कोर्ट के विचाराधीन हो गया है। वह उम्मीद करती हैं कि सरकार और दिल्ली पुलिस एक दिन इंतजार करेगी और उसे रिहा नहीं करेगी।

क्‍या है पूरा मामला

आपको बता दें कि 16 दिसंबर 2012 को दक्षिण दिल्ली में चलती बस में पांच लोगों ने निर्भया के साथ गैंगरेप किया था जिसमें एक नाबालिग भी शामिल था। नाबालिग को मौजूदा कानून के मुताबिक तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेजा गया था और आज उसकी सजा की मियाद पूरी हो रही है।

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