डेढ़ सौ साल पुरानी लाइब्रेरी का निगरानी कैमरा खराब

इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की आर्ट फैकेल्टी स्थित केंद्रीय लाइब्रेरी असुरक्षा के दायरे में आ चुकी है। लाइब्रेरी में मौजूद  तकरीबन सात लाख किताबों की रखवाली खराब सीसीटीवी कैमरों के भरोसे है। खराब सीसीटीवी को बनवाने को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से भी अब तक कोई गंभीरता नजर नहीं आई। तीसरी आंख में आई खराबी की वजह से लाइब्रेरी में मौजूद किताबों के गायब होने का अंदेशा बढ़ गया है।
पन्ने फांड ले जा रहे हैं छात्र
इस केंद्रीय लाइब्रेरी की स्थापना को डेढ सौ साल होने वाले हैं। लाइब्रेरी में करोडों रुपए की किताबें हैं। इसमें मौजूद पुस्तके  विद्यार्थियों के कोर्स सहित अन्य तरह की किताबें रखी गई हैं। इन किताबों के संग्रह से प्रतिदिन करीब डेढ से दो हजार विद्यार्थी बैठकर पढाई करते हैं। लाइब्रेरी किताबों की ठीक प्रकार से निगरानी नहीं होने से आए दिन किताबों में से कई पन्ने गायब रहते हैं। कई बार विद्यार्थी पढऩे के लिए किताबें लेने के बाद कुछ पन्ने फाड़ ले जाते हैं। इसके कारण अन्य विद्यार्थियों को अधूरी किताबें ही पढऩे को मिलती है।

जिम्मेदारों को नही जानकारी
किताबों की निगरानी के लिए करीब 13 साल पहले रीडिंग हॉल में सीसीटीवी कैमरा लगाया गया था। यह कब खराब हो गया। यह लाइब्रेरी के सब डायरेक्टर बीके सिंह को भी नहीं मालूम। इस संबंध में बीके सिंह ने बताया कि करीब 13 साल पहले रीडिंग रूम के अलावा विश्वविद्यालय के करीब 17 जगहों पर सीसीटीवी लगाया गया था। इसमें अब कोई भी ठीक नहीं है। वहीं बाद में लगाया गया लाइब्रेरी के कम्प्यूटर रूम व गेट पर लगाया गया सीसीटीवी ठीक हालत में हैं। हालांकि, इसकी जानकारी सभी को है। यह अलग फंड से बने होने के कारण अब तक नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा कि गेट का सीसीटीवी ठीक होने के कारण इसके खराब होने से कोई ज्यादा फर्क नहीं पडता।

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