सुषमा स्वराज ने मसूद अजहर के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा,UPA-NDA सरकार में की गई कार्रवाई में बताया अंतर

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नई दिल्ली: 13 मार्च 2019 को मसूद अजहर के मुद्दे पर चीन की नापाक चाल एक बार फिर उजागर हुई। तकनीकी आधार पर आपत्ति जताते हुए चीन ने वीटो लगा दिया और इस तरह मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने की मुहिम को झटका लगा। चीन की इस कार्रवाई के बाद भारत में विरोधी दलों खासतौर से कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि झूला नीति और बिना एजेंडा बातचीत नाकाम साबित हुई है। सच तो ये है कि नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग से डरते हैं।

कांग्रेस के आरोपों को करारा जवाब देते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सिलसिलेवार मसूद अजहर के खिलाफ यूएन में लाए गए प्रस्तावों को बताया।
सुषमा स्वराज ने कहा कि मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किए जाने के मामले में चार बार प्रस्ताव लाया गया। 2009 में पहला प्रस्ताव लाया गया जिसमें भारत अकेले प्रस्तावक था। लेकिन मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद हालात बदले। 2016 में भारत की तरफ से प्रस्ताव लाया गया जिसमें अमेरिका, फ्रांस और यूके सह प्रस्तावक थे। 2017 में मसूद अजहर के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव में यूएसए, यूके और फ्रांस प्रस्तावक थे। 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद एक बार जैश सरगना के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया जिसे फ्रांस की तरफ से पेश किया गया था और यूके और अमेरिका का समर्थन हासिल था।

बता दें कि फ्रांस ने आतंक के आका मसूद अजहर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का ऐलान किया। फ्रांस सरकार ने मसूद अजहर की संपत्तियों को जब्त करने की घोषणा की है। फ्रांस का कहना है कि चीन के कदम से निराशा है। लेकिन किसी भी संप्रभु राष्ट्र को आतंकवाद को कुचलने का अधिकार है। चीन ने जिस तरह से मसूद अजहर के मुद्दे पर अपने नजरिए को रखा है उसे उचित नहीं कहा जा सकता है।

 

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