निलंबित SHO विनय तिवारी ने जनेऊ दिखाकर विकास दुबे से बचाई थी जान

मोस्ट वॉन्टेड विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद कानपुर शूटआउट की मेन कड़ी राहुल तिवारी भी सामने आ गया है. ये वही शख्स है, जिसकी एफआईआर के बाद पुलिस बिकरू गांव में विकास दुबे के यहां दबिश देने गई थी. राहुल ने पुलिस को बताया कि विकास दुबे ने रास्ते से उसे उठा लिया था और घर में जमकर मारा पीटा भी था.

राहुल तिवारी की माने तो जब विकास दुबे ने उसके साथ मारपीट की तो चौबेपुर थाने के निलंबित एसओ विनय तिवारी भी उस वक्त विकास दुबे के यहां मौजूद थे, जिन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है. राहुल का कहना है कि थाना प्रभारी विनय तिवारी ने अपना जनेऊ दिखाकर विकास दुबे से जान बचाई थी.

राहुल तिवारी की शिकायत क्या है?

चौबेपुर के ही जादेपुर गस्सा गांव के रहने वाले राहुल तिवारी ने आरोप लगाया था कि विकास ने उनके ससुर लल्लन शुक्ला की जमीन का जबरन दानपात्र में बैनामा करा लिया था. इसे लेकर राहुल ने कोर्ट केस फाइल किया. आरोप है कि एक जुलाई को विकास दुबे और उसके कुछ लोगों ने राहुल तिवारी को काफी मारा-पीटा और केस वापस लेने को कहा.

राहुल तिवारी ने इसकी शिकायत चौबेपुर थाने में की, लेकिन एसओ विनय तिवारी ने शिकायत नजरअंदाज कर दी. इसके बाद राहुल तिवारी ने सीओ बिल्हौर देवेंद्र मिश्रा से शिकायत की. सीओ देवेंद्र मिश्रा के निर्देश आने के बाद चौबेपुर थाने में एफआईआर दर्ज की गई.

राहुल की शिकायत पर दबिश देने गई थी टीम

राहुल तिवारी की एफआईआर के बाद सीओ देवेंद्र मिश्रा ने कई थानों की फोर्स के साथ विकास दुबे के घर दबिश का प्लान बनाया. दबिश देने गई पुलिस पर विकास दुबे के गैंग ने हमला कर दिया, जिसमें 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए. इसके बाद पुलिस ने विकास और उसके साथियों की तलाश की. आखिर में विकास दुबे और उसके पांच गुर्गे मारे गए.

12 दिन बाद गांव लौटा राहुल तिवारी

2-3 जुलाई कि दरमियानी रात विकास दुबे ने आठ पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या कर दी थी. इस हत्याकांड के बाद राहुल तिवारी भी फरार हो गया था. अब विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद वह अपने गांव लौटा है और पूरी घटना को बता रहा है. उसकी माने तो विकास दुबे से एसओ विनय तिवारी भी डरता था.

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