स्विस बैंक में खाता है दून घाटी के बहादुर का

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देहरादून। स्विटजरलैंड ने हाल ही में 2,600 निष्क्रिय खाताधारकों के नाम सार्वजनिक किए हैं जिनमें देहरादून के रहने वाले बहादुर चंद्र सिंह का नाम भी शामिल है। स्विस बैंक द्वारा जारी की गयी नामों की सूची में चार भारतीय भी शामिल हैं। इन चार भारतीयों में से दो का निवास भारत में बताया गया है जबकि एक का निवास पेरिस में बताया गया है। वहीं चौथे भारतीय के निवास का खुलासा नहीं किया गया है। चार भारतीय खाताधारकों के नामों में पियरे वाचेक, देहरादून के बहादुर चंद्र सिंह, पेरिस के डॉ. मोहन लाल और किशोर लाल शामिल हैं।

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स्विटजरलैंड ने 2,600 खाताधारकों और 80 सेफ डिपॉजिट बॉक्स मालिकों के नाम सार्वजनिक किए हैं। सार्वजनिक की गई सूची में वे खाते शामिल हैं जिसमें कम से कम 500 स्विस फ्रैंक जमा हैं और जिनपर बीते 60 सालों से कोई दावा नहीं किया गया है। इन खातों में 440 लाख स्विस फ्रैंक यानी करीब 300 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। हालांकि, स्विटजरलैंड ने इस बात का कोई खुलासा नहीं किया है कि भारतीय खाताधारकों के खातों में कितने पैसे हैं।

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स्विटजरलैंड की ओर से पहली बार जारी की गयी सूची

काले धन को लेकर स्विटजरलैंड ने पहले ही उन भारतीय और विदेशी खाताधारकों के नाम सार्वजनिक करने शुरू कर दिए हैं जिनके बैंक खाते जांच के घेरे में हैं। इसके अलावा जिनके बारे में विदेशी प्राधिकरणों ने पर्याप्त सबूत के साथ विस्तृत जानकारी मांगी है। ये पहला मौका है जब स्विटजरलैंड ने ऐसी सूची जारी की है। जबकि स्विस बैंक खाताधारकों की जानकारी गोपनीय रखने के लिए जाना जाता है। इस सूची का प्रकाशन स्विस बैंक एसोसिएशन ने किया है। इसके साथ ही बैंक ने ये भी कहा कि 2016 से हर साल ऐसे निष्क्रिय खातों से जुड़ी जानकारियां सालाना आधार पर सार्वजनिक की जायेंगी।

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एक से पांच साल की अवधि में दावा कर सकेंगे रिश्तेदार

स्विस बैंकिंग ओम्बुड्समैन और स्विस बैंकर्स एसोसिएशन (एसबीए) के मुताबिक खाताधारकों के रिश्तेदारों और उत्तराधिकारियों को इन खातों पर दावा करने के लिए एक से पांच साल का समय मिलेगा। पहली बार स्विटजरलैंड ने ऐसी सूची प्रकाशित की है जिसका लक्ष्य खाताधारकों के उत्तराधिकारियों को खाते में पड़े पैसों का दावा करने का पूरा-पूरा मौका देना है। एसबीए ने ये भी कहा है कि अगर संबंधित पक्ष की तरफ से सूची प्रकाशित होने से एक साल के भीतर कोई दावा नहीं किया जाता है, तो कानून के मुताबिक बैंक खाते में पड़ी परिसंपत्ति सरकार को हस्तांतरित कर दी जायेगी। वहीं जो खाते 1954 से यानी बीते 60 सालों से निष्क्रिय पड़े हैं उन पर पांच साल तक दावा किया जा सकता है।

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ग्राहकों से संपर्क साधने की अंतिम कोशिश : एसबीए

स्विस बैंकर्स एसोसिएशन के सीईओ क्लाउडे-एलायन मार्गेलिश्च के मुताबिक, ‘इस सूचना को प्रकाशित कर बैंक अपने उन ग्राहकों से संपर्क करने की आखिरी कोशिशें कर रहा है जो खाता खुलवाकर देखने तक नहीं आये’। यह प्रकाशन ग्राहकों और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को निष्क्रिय खातों पर दावा करने का अंतिम मौका भी देगा। अगर संबंधित लोगों ने समय रहते इन खातों या उसमें मौजूद राशि के लिये दावा नहीं किया तो बैंक निश्चित रूप से परिसंपत्तियां सरकार को हस्तांतरित कर देगा।

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स्विस खाताधारक बहादुर चंद्र की तलाश

स्विस बैंक की सूची में देहरादून के जिस बहादुर चंद्र का नाम आया है उसका पता लगाने में आयकर और प्रवर्तन निदेशालय की टीमें लगी हुई हैं। दोनों ही विभाग पुराने रिकार्ड खंगाल रही हैं साथ ही दिल्ली स्थित आयकर कार्यालय से भी जानकारी ली जा रही है। अभी तक इस बात का पता नहीं चल सका है कि बहादुर सिंह कौन है और दून में कहां रहता है और वो मौजूदा समय में जीवित भी है या नहीं।

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