जल्द लौटेगी प्रेम का प्रतीक माने जाने वाले ताजमहल की सुंदरता

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आगरा। आगरा में स्थित ताजमहल भारत की शान और दो लोगों की महोब्बत की निशानी माना जाता है। दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल की सुंदरता से तो हर कोई वाकिफ है। ऐसे में उसकी सुंदरता पर दाग लगे तो ये कहां पर से सही होगा।

ताजमहल

लेकिन ये सच है। कई दिनों से प्रदूषण की बढ़ती कालिख से ताज की सौंदर्य भरी सुंदरता पर चांद में दाग होने जैसा दिखाई दे रहा है। इसकी वजह से उसपर पीलेपन के दाग लग गए हैं। हालांकि इसके पीलेपन को हटाने के लिए मुल्तानी मिट्टी का लेप (मडपैक) लगाया जा रहा लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा।

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अब होगा ताज के पीलेपन का इलाज

ताज के पीलेपन को हटाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रसायन शाखा ने इसके कारण की पहचान करने के लिए अपनी कमर कास ली है। इसके लिए अब वो आईआईटी और वाडिया इंस्टीट्यूट, देहरादून की भी मदद लेगा।

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क्या रही वजह

ताज को प्रदूषण से बचाने के लिए दो दशक पहले ताज टिपेजियम जोन (टीटीजेड) बनाया गया था। यहां तक की हरियाली पर जोर देते हुए प्रदूषणकारी उद्योगों को भी बंद कराया गया था। लेकिन फिर भी कोई फायदा नहीं निकला। अप्रैल, 2015 में संसद की पर्यावरण संबंधी स्थाई समिति ने ताज का निरीक्षण कर कंपोजिट प्लान बनाने के निर्देश दिए। इसके बाद ताज पर मडपैक ट्रीटमेंट शुरू किया गया।

ताजमहल

हालांकि इसकी मदद से प्रदूषण के दाग हटाये तो जा रहे हैं लेकिन बावजूद इसके प्रयावरण में सुधार न होने पर फिर से इसकी जरुरत पड़ेगी। इसे देखते हुए एएसआई की रसायन शाखा पिछले दिसंबर से जांच में जुटी है। साथ ये ये भी पाता लगाया जा रहा है कि किस तरफ ज्यादा प्रदूषण है और उसमें कौन-कौन से तत्व शामिल हैं।

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साल 2014 में हुआ खुलासा

ताज के पीलेपन को लेकर 2014 में जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी अटलांटा, अमेरिका, आइआइटी कानपुर और एएसआई की रसायन शाखा ने नवंबर 2011 से दिसंबर 2012 तक ताज पर अध्ययन किया। तब जाकर इस बात का खुलासा हुआ कि ताज की सतह पर 55 फीसद धूल कण, 35 फीसद ब्राउन कार्बन कण और 10 फीसद ब्लैक कार्बन कण पाए गए थे।

इन सब के अलावा डीजल से चलने वाले वाहन और उपले के जलने से निकलने वाला कार्बन कण भी एक मुख्य वजह रही है। इसकी वजह से ताज में पीलापन आ रहा है।

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