अटल बिहारी वाजपेयी की 96वीं जयंती पर डालें उनके सियासी सफर पर नज़र

भारत की शान और जान माने जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की आज 96वीं जयंती है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 अगस्त 2018 को दिल्ली में अपनी आखरी सांस ली और पंचतत्व में विलीन हो गए।

नई दिल्ली : भारत की शान और जान माने जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की आज 96वीं जयंती है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अगर आज जीवित होते तो वह वह अपना 96वां जन्मदिन मन रहे होते। लेकिन वाजपेयी अब सिर्फ कथाओं, कहानियों और राजनीतिक गलियारों में रचते-बास्ते हैं। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 अगस्त 2018 को दिल्ली में अपनी आखरी सांस ली और पंचतत्व में विलीन हो गए।

वाजपयी का राजनीतिक गलियारों में एहम योगदान रहा है। उनकी ज़िन्दगी के किस्सों का ज़िक्र नीति, लोकप्रिय नेता और बेहतरीन कवि पर चर्चा के दौरान किए जाते हैं। आज उनकी 96वीं जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अन्य राजनेताओं ने उनके स्मारक ‘सदैव अटल’ पर पुष्पांजलि अर्पित की। यही नहीं अटल बिहारी वाजपेयी के परिजनों ने पूर्व प्रधानमंत्री को पुष्पांजलि अर्पित की। उनके जन्म दिवस पर एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

पीएम मोदी ने किया वाजपेयी की किताब का विमोचन

पंडित मदन मोहन मालवीय और अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के मौके पर संसद के सेंट्रल हाउस में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां दोनों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी ने “संसद में अटल बिहारी वाजपेयी: एक स्मृति खंड” नामक किताब का विमोचन किया। इस किताब के ज़रिये अटल जी के जीवन पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही साथ संसद में उनके द्वारा दिए गए उल्लेखनीय भाषण भी इस किताब में शामिल हैं। किताब में उनके जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी दुर्लभ तस्वीरें भी हैं जो आपको शायद ही कहीं देखने को मिलेंगी।

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वाजपेयी के सियासी सफर पर नजर

अटल बिहारी वाजपेयी भारत की सियासत का एक बड़ा चेहरा हैं। जिनसे शायद इस देश का बच्चा-बच्चा वाकिफ है। वाजपेयी भारतीय सियासत का एक ऐसा चेहरा रहे हैं जिनका आपको शायद ही कोई दुश्मन मिले। शांत स्वाभाव और शीतल व्यक्तित्व वाले वाजपेयी कवि पत्रकार, संघ के कार्यकर्ता के तौर पर लगातार विजय पथ पर बढ़ रहे वाजपेयी पहली बार 1957 के लोकसभा चुनाव में जीतकर संसद पहुंचे। वह 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और गुजरात से सांसद भी रह चुके हैं। वह भारत के तीन बार के प्रधानमंत्री थे और 22 मई 2004 तक वह भारत के प्रधानमंत्री बने रहे।

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