Taliban ने भारत की ओर बढ़ाया ‘दोस्ती का हाथ’

तालिबान के प्रमुख नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकज़ई ने कहा है कि तालिबान भारत के साथ 'दोस्तान संबंध' बनाने का इच्छुक है. स्टानिकज़ई क़तर के दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच हुई बातचीत का अहम हिस्सा रहे हैं

अफ़गानिस्तान: तालिबान के प्रमुख नेता शेर मोहम्मद अब्बास स्टानिकज़ई ने कहा है कि तालिबान भारत के साथ ‘दोस्तान संबंध’ बनाने का इच्छुक है. स्टानिकज़ई क़तर के दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच हुई बातचीत का अहम हिस्सा रहे हैं. ऐसी अटकलें हैं कि मोहम्मद अब्बास स्टानिकज़ई को तालिबान अपना विदेश मंत्री बना सकता है. दोहा से दिए इस इंटरव्यू में अब्बास ने कहा कि तालिबान भारत समेत सभी पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध चाहता है.

जाने स्तानिकज़ई ने आगे क्या कहा

भारत के प्रति तालिबान प्रशासन के विचार पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “हमारी विदेश नीति पूरी दुनिया और सभी पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध विकसित करने की है. अमेरिकी सेना अफ़गानिस्तान में कम से कम 20 साल तक रही. इसके बाद भी अमेरिका और नेटो देशों से हमारे अच्छे संबंध होंगे. इसलिए मुझे लगता है कि उन्हें अफ़गानिस्तान के पुनर्निर्माण में भी हिस्सा लेना चाहिए. यही बात भारत पर भी लागू होती है, हम सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्ते जारी रखना चाहते हैं. सिर्फ़ भारत ही नहीं, बल्कि हमारे सभी पड़ोसी देशों- तजाकिस्तान, ईरान और पाकिस्तान के साथ हम अच्छे रिश्ते चाहते हैं.”

शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकज़ई
शेर मोहम्मद अब्बास स्तानिकज़ई

जाने स्तानिकज़ई ने भारत को लेकर क्या कहा

आशंका जताई जा रही है कि तालिबान भारत के ख़िलाफ़ सख़्त रवैया अख़्तियार कर सकता है और पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत को निशाना बना सकता है. इन सभी अटकलों को स्तानिकज़ई ने ग़लत करार दिया है उन्होंने कहा, “मीडिया में जो बातें चलती हैं, वो अक्सर ग़लत ही होती हैं. हमारी तरफ़ से न तो कोई ऐसा बयान आया है और न ही कोई संकेत.” इस आशंका के बारे में पूछे जाने पर मोहम्मद अब्बास स्टानिकज़ई ने कहा कि अफ़गानिस्तान से भारत समेत किसी भी पड़ोसी देश को न तो अतीत में कोई ख़तरा था और न भविष्य में होगा.

जाने स्तानिकज़ई भारत और पाकिस्तान को लेकर क्या बयान दिया

अब्बास ने कहा इसमें कोई शक़ नहीं है कि भारत और पाकिस्तान के बीच पुराना और लंबा राजनीतिक-भौगोलिक विवाद है, लेकिन हमें उम्मीद है कि वो अपने आंतरिक झगड़े के लिए अफ़गानिस्तान का इस्तेमाल नहीं करेंगे. वो लंबी सीमा साझा करते हैं और वो वहीं आपस में लड़ सकते हैं. हम किसी और को लड़ाई के लिए अफ़गानिस्तान का इस्तेमाल नहीं करने देंगे.

 

जाने अब्बास स्तानिकज़ई ने हिन्दू, सिख और अफ़गानिस्तान के भविष्य के बारे में क्या कहा

मुझे लगता है कि उन्हें बचाए जाने की कोई ज़रूरत नहीं है. अफ़ग़ानिस्तान उनका भी घर और देश हैं. वो यहाँ शांतिपूर्वक रह सकते हैं, उनकी ज़िंदगी को यहाँ कोई ख़तरा नहीं है. वो यहाँ वैसे ही रह सकते हैं, जैसे पहले रहते थे. हमें उम्मीद है कि पिछले 20 वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान से भारत गए हिंदू और सिख दोबारा यहाँ वापस आएँगे भारत ने अफ़गानिस्तान में विकास के जो काम किए है वो हमारी राष्ट्रीय संपत्ति है. हम उन्हें वैसे ही रखेंगे और हमें उम्मीद है जो काम अधूरे रह गए हैं भारत उन्हें भविष्य में पूरा करेगा. हम भारत को अधूरी पड़ी परियोजनाओं को पूरा करने और दोबारा काम शुरू करने के लिए आमंत्रित करते हैं.

 

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