फेक न्यूज को लेकर बोला फेसबुक, कहा- इसे हटाना ‘बोलने की आजादी’ खत्म करना

नई दिल्ली: फेक न्यूज फैलाकर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप झेल रही दिग्गज सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने कहा है कि वो अपने प्लेटफॉर्म से फेक न्यूज को हटा नहीं सकते हैं, यह बोलने की आजादी खत्म करने जैसा होगा। लेकिन अगर कोई पोस्ट झूठी अफवाह फैलाने वाला लगेगा तो उसे न्यूज फीड में नीचे कर दिया जाएगा। फेसबुक ने झूठी खबर न हटाने का तर्क बताते हुए कहा कि ऐसी खबरें कंपनी के ‘कम्युनिटी स्टैंडर्ड’ का उल्लंघन नहीं करती हैं।

फेक न्यूज हटाना यानी बोलने की आजादी खत्म करना

दरअसल, सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक इन दिनों ब्रिटेन में फेक न्यूज के खिलाफ एक एडवर्टाइजिंग कैंपेन चला रही है, जिसको ‘फेक न्यूज इज नॉट अवर फ्रेंड’ नाम दिया गया है। लेकिन फेसबुक का कहना है कि ‘फेक न्यूज जैसी पोस्ट करने वालों का एक अलग नजरिया होता है और उसे हटाना फ्रीडम ऑफ स्पीच को खत्म करना है।

सिर्फ इतना करेगा फेसबुक

न्यूयॉर्क में एक न्यूज चैनल के रिपोर्टर को फेसबुक की तरफ से जवाब देते हुए जॉन हेगमन ने कहा कि ‘हमने फेसबुक बनाया था, ताकि लोग अपनी बात एक दूसरे और दुनिया के सामने रख सकें।’ वहीं कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि ‘एक्सप्रेशन को लोग फेक न्यूज की तरह पोस्ट कर सकते हैं, पर हम इसे ऊपर नहीं दिखाएंगे।

फेक न्यूज को कैसे पता करेगा फेसबुक?

फेसबुक ने फेक न्यूज पोस्ट का पता लगाने को लेकर बताया कि अगर किसी पोस्ट पर फेसबुक यूजर्स रिपोर्ट करते हैं और पोस्ट में दिए गए फैक्ट्स को गलत बताते हैं तो उस पोस्ट को न्यूज फीड में डिमोट कर दिया जाएगा। हालांकि यह तब भी फेसबुक पर रहेगा, पर इसे कोई देख नहीं सकेगा।

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