कावेरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तमिलनाडु सरकार संतुष्ट, कहा- सब अच्छा होगा

नई दिल्ली| तमिलनाडु के कानून मंत्री सीवी षड़मुगम ने सोमवार को कावेरी जल विवाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि इसके बाद सब ‘अच्छा’ होगा। सुप्रीम कोर्ट के 16 फरवरी के आदेशानुसार केंद्र सरकार को अंतरराज्यीय जल विवाद अधिनियम की धारा 6ए के तहत तीन मई तक एक योजना तैयार करने का आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि आज के आदेश से सब अच्छा होगा। संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि इस मुद्दे में विलंब करना चाहिए।

षड़मुगम ने कहा कि तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर की गई अवमानना याचिका किसी भी व्यक्ति को दंडित करने के लिए नहीं की गई थी, बल्कि 16 फरवरी के फैसले को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए की गई थी।

आपको बता दें कि कावेरी प्रबंधन बोर्ड (CMB) के गठन को लेकर अभी बीते दिनों तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के खिलाफ अवमानना नोटिस दायर की थी। तमिनाडु ने इस अवमानना याचिका में कहा है कि केंद्र एक योजना बनाकर इस फैसले को प्रभावी करने के लिए बाध्य था ताकि छह हफ्ते के भीतर कावेरी प्रबंधन बोर्ड और कावेरी जल नियमन समिति के अधिकारी तय किए जा सकें।

क्या है कावेरी जल विवाद

भारतीय संविधान के अनुसार कावेरी एक अंतर्राज्यीय नदी है। कर्नाटक और तमिलनाडु इस कावेरी घाटी में पड़ने वाले प्रमुख राज्य हैं। इसलिए दोनों ही इस पर अपना हक जता रहे थे। लेकिन इस घाटी का एक हिस्सा केरल में भी पड़ता है और समुद्र में मिलने से पहले ये नदी कराइकाल से होकर गुजरती है, जो पुडुचेरी का हिस्सा है। इसलिए इस नदी के जल के बंटवारे को लेकर इन चारों राज्यों में विवाद का एक लंबा इतिहास रहा है। चारों राज्य ही इस नदी पर अपना अधिकार जताते आ रहे हैं।

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