हिंदी साहित्य के इतिहास से छेड़छाड़, कई जगह बदले नाम

462 शब्दों में लिखे गए इतिहास में जहां हिंदी साहित्य का इतिहास लिखा गया है उसमें अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी लिखा गया है

जरा सोचिए, अगर अकबर इलाहाबादी का नाम बदलकर अकबर प्रयागराजी कर दिया जाए, तेग इलाहाबादी को तेज प्रयागराजी कहा जाए. राशिद इलाहाबादी को राशिद प्रयागराजी लिखा जाए? कैसा लगेगा? योगी सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया था. अब उससे एक कदम आगे बढ़कर उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने उन कालजयी शायरों के नाम भी बदल डाले जिनके नाम के आगे इलाहाबादी टाइटल लगा था. आयोग ने ‘एबाउट इलाहाबाद’ वाले कॉलम में अकबर इलाहाबादी, तेग इलाहाबादी और राशिद इलाहाबादी के नाम बदल दिए हैं.

जानकारी से आयोग का इंकार

इसकी कड़ी आलोचना हो रही है. उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने बताया कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है. अगर ऐसा है तो यह गलत है. इसे अभी दुरुस्त किया जाएगा.

आफिशियल वेबसाइट पर बदल डाला नाम

उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट uphesc.org के ‘ अबाउट अस’ कॉलम में अबाउट इलाहाबाद सब कॉलम दे रखा है. इसे क्लिक करने पर एक पेज खुलता है. जिसमें एबाउट इलाहाबाद लिखा है. उस पर क्लिक करने पर एक पेज खुलता है.

हिंदी साहित्य के इतिहास में बदला नाम

जिसमें प्रयागराज का इतिहास लिखा गया है. 462 शब्दों में लिखे गए इतिहास में जहां हिंदी साहित्य का इतिहास लिखा गया है उसमें अकबर इलाहाबादी को अकबर प्रयागराजी लिखा गया है. इसके अलावा तेज इलाहाबादी को तेग प्रयागराजी और राशिद इलाहाबादी को राशिद प्रयागराजी लिखा गया है.

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