टेलीग्राम चैनल ने जरी की 3 आतंकियों की तस्वीरें, सभी हमलों के पीछे था IS का हाथ

कोलंबो: श्रीलंका में रविवार को हुए श्रंखलाबद्ध बम धमाकों में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट का हाथ हो सकता है। ईस्टर संडे की सुबह को कोलंबो में तीन चर्चों और तीन होटलों पर किए गए आत्मघाती हमले में 290 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 450 से अधिक लोग घायल हो गए थे। हालांकि, इस हमले की जिम्मेदारी किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली थी, लेकिन इस्लामिक स्टेट समर्थक कुछ टेलिग्राम चैनलों पर सोमवार को 3 कथित आत्मघाती हमलावरों की तस्वीरों को जारी की हैं।

इसके बाद से साफ हो गया है कि सीरिया में वजूद खत्म होने के बाद आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने श्रीलंका का रुख कर लिया है। टेलिग्राम चैनलों ने तीनों कथित आत्मघाती हमलावरों का नाम अबुल बर्रा, अबुल मुख्तार और अबु उबैदा बताया है। खुफिया एजेंसियां को इन तस्वीरों में कुछ हद तक सच नजर आ रहा है क्योंकि जिन तीनों आतंकियों की तस्वीर जारी की गई है, उसमें से एक जाहरान हाशिन है।

वह नेशनल तौहीद जमात नाम के चरमपंथी संगठन से जुड़ा है और टेलिग्राम चैनलों में उसका परिचय अबु उबैदा के रूप में दिया गया है। तीनों आत्मघाती हमलावरों में उबैदा की फोटो बिना नकाब के जारी की गई हैं, जबकि बाकी दो आत्मघाती हमलावरों की पहचान स्थापित करने के लिए खुफिया एजेंसियां जद्दोजेहद कर रही हैं।

एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि आत्मघाती आतंकियों को वैसे ही नाम दिए गए हैं, जैसे अबु बकर अल बगदादी के प्रति निष्ठा जताने वाले लड़ाकों को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट देता है। उबैदा की तस्वीरों के पीछे भी वैसा ही बैकग्राउंड है और इससे संकेत मिल रहे हैं कि नेशनल तौहीद जमात का संबंध इस्लामिक स्टेट से है।

इंटेलिजेंस नेटवर्कों को दोनों संगठनों के बीच संबंध होने का शक इसलिए भी दिख रहा है क्योंकि एक महीने पहले ही इस्लामिक स्टेट के प्रवक्ता अबु हसन अल-मुजाहिर ने अपनी एक ऑडियो जारी किया था। इसमें उसने मुस्लिमों से न्यूजीलैंड में मस्जिद पर हमले का बदला लेने की बात कही थी, जिसमें एक बंदूकधारी ने मस्जिदों पर हमला कर 50 लोगों की हत्या की थी।

बताते चलें कि तौहीद जमात आतंकी संगठन श्रीलंका के पूर्वी इलाके में सक्रिय है और वह वहां शरिया कानून को लागू करने की कोशिश कर रहा है। यह संगठन वहाबी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करता है। यह श्रीलंका का एक कट्टरपंथी मुस्लिमों का संगठन है, जो पिछले साल भगवान बौद्ध की कुछ मूर्तियां तोड़ने के बाद चर्चा में आया था। इसके बाद से देश के बौद्ध धर्म के अनुयाइयों और मुस्लिमों के बीच तनाव बढ़ा है। इस इस्लामिक संगठन का एक धड़ा भारत के तमिलनाडु में सक्रिय है।

यह यहां पर कट्टरपंथी संदेशों के प्रसार के लिए महिलाओं को बुर्का पहनने और मस्जिदों के निर्माण के साथ शरिया कानून लागू करने और चरमपंथी संदेशों को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। इन हमलों को उसी तरह से अंजाम दिया गया है, जैसे साल 2016 में बांग्लादेश के ढाका में होली आर्टिसन बेकरी में धमाके किए गए थे।

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