#Pathankot के आतंकियों ने पाकिस्तान के एयरबेस पर ट्रेनिंग ली थी

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नई दिल्ली। पठानकोट एयरबेस पर हमले को 100 से ज्यादा घंटे बीत चुके हैं। इस हमले से संबंधित एक बड़ी खबर आ रही है आतंकियों की योजना पूरे पठानकोट एयरबेस को तबाह करने की थी। इसके लिए आतंकियों को बाकयादा पाकिस्तान के दो एयरबेस पर ट्रेनिंग दी गई थी।

रावलपिंडी और दूसरा फैसलाबाद का एयरफोर्स बना ट्रेनिंग सेंटर
हमले के लिए पाकिस्तान के रावलपिंडी के चकलाला का एयरफोर्स बेस नूर खान और दूसरा फैसलाबाद के पासबना लायलपुर एयरबेस को ट्रनिंग सेंटर बनाया गया था। इन दोनों एयरबेस पर बाकयदा आतंकियों को एक महीने की ट्रनिंग दी गई। जिसमें आतंकियों को पठानकोट के एयरक्राफ्ट और एयरबेस की पूरी जानकरी दी गई। आतंकियों को एयबरेस पर रहने वाले हथियारों और सामानों से वाकिफ कराया गया।

ऐलुमिनियम पावडर: आग लगाने की थी तैयारी
ऐलुमिनियम पावडर भी अतंकियो के पास से मिला था। ये ऐसा पावडर होता है जो आग लगाने में प्रयोग किया जाता है और आग को पानी से नहीं बुझाया जा सकता। एयर क्राफ्ट और हेलिकॉप्टेर सहित एयरबस में आग लगाने की योजना थी।

ट्रक में लगाई आग
आतंकी एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर तक पहुंचने में कामयाब तो नहीं हो सके लेकिन आतंकियों ने एयरफोर्स स्टेशन के भीतर ट्रक में आग लगा दी थी। दरअसल आतंकियों के आने से पहले खुफिया सूचना के आधार पर अहम एयरक्राफ्ट और मिसाइड को हटा दिया गया था।

महत्वपूर्ण एयरक्राफ्ट को दो दिन पहले ही हटाया
हमले से दो दिन पहले एयरबेस से महत्वपूर्ण एयरक्राफ्ट और मिसाइल को हटा दिया गया था। पठानकोट एयरबेस का स्पेसिफिक इनपुट नहीं था लेकिन मिलिट्री स्टेब्लिशमेंट पर हमले का इनपुट था।

पायलट की ट्रेनिंग नहीं दी गई
आतंकियों को हालांकि पायलट की ट्रेनिंग नहीं दी गई थी जिससे वो एयरक्राफ्ट को लेकर जा पाते लेकिन उन्हें एयरक्राफ्ट को बर्बाद करने के लिए साजोसामान के साथ तैयार करके भेजा गया था। आतंकियों को मारने के बाद 29 धमाके हुए जो आतंकियों ने एयरबेस पर अलग-अलग जगह फैला दिए थे लेकिन आतंकियों को घेरने में सुरक्षाबल कामयाब हो गए।

ऑपरेशन को धीरे धीरे पूरा किया
पूरे ऑपरेशन के दौरान आर्मी, NSG और वायुसेना में पूरा समन्वय था। जानबूझ कर ऑपरेशन को धीरे धीरे पूरा किया गया ताकि आतंकियो के पास रशद, खाने पीने के सामान की कमी हो और थकान बढे।

बड़ा नुकसान नहीं
पाकिस्तान में एयरबेस पर ट्रेनिंग लेकर लौटे आतंकी पठानकोट एयरबेस में दाखिल होने में तो कामयाब हो गए लेकिन खुफिया जानकारी और सुरक्षाबलों की सूझबूझ से रक्षा से जुड़े साजो-सामान को बड़ा नुकसान नहीं हुआ हालांकि सात जवानों को शहादत देनी पड़ी।

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