थाईलैंड रेस्क्यू: गुफा में फंसे सभी बच्चे सुरक्षित, दिमाग़ पर कैसा होगा इसका असर

बैंककॉक: थाइलैंड के उत्तर में चियांग राई इलाके की टैम लूंग गुफा में फंसे सभी बच्‍चों और उनके कोच को तीन दिन की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार सुरक्षित बचा लिया गया है। इस बचाव अभियान के बाद राहतकर्मियों को मंगलवार को सभी को बाहर निकाल लेने में कामयाबी मिली है। थाई नेवी सील ने इसकी घोषणा की है। हालांकि सवाल ये उठता है कि गुफा से निकाले गये इन बच्चों पर इस घटना का क्या दिमागी प्रभाव देखा जा सकता है और इसके दूरगामी परिणाम किस प्रकार के हो सकते हैं…?

कैसी है गुफा से बाहर आए बच्चों की सेहत

दरअसल, थाइलैंड की टैम लूंग गुफा में पिछले 23 जून से बच्चों की एक फुटबॉल टीम फंसी हुई थी। जिसे थाई की नेवी सेल व क्षेत्रीय लोगों की कड़ी मेहनत से तीन दिन तक चले अभियान के बाद मंगलवार को सुरक्षित निकाला गया है। गुफा में फंसे सभी बच्चों और कोच को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। थाईलैंड के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया है कि बाहर निकाले गए बच्चों की हालत ठीक है। हालांकि कुछ बच्चों के फेफड़ों में संक्रमण की आशंका जताई जा रही है और उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। लेकिन किसी बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी किसी बड़ी परेशानी की बात फ़िलहाल सामने नहीं आई है।

बच्चों पर क्या हो सकता है घटना का असर

इस घटना में गुफा में फंसे बच्चों को भले ही सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया हो, लेकिन इसका दूरगामी समय में बच्चों के दिमाग और सेहत पर क्या असर होगा। इस पर कई प्रकार के उठ रहे हैं।

  • क्या हफ़्तों तक अंधेरी गुफा में रहने के बाद बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर कोई असर पड़ेगा?
  • क्या उन्हें लंबे वक़्त तक किसी परेशानी का सामना करना पड़ेगा?
  • किसी अंधेरी, सुनसान जगह में हफ़्तों फंसे रहने का एक बच्चे के दिमाग पर कैसा असर पड़ता है?
  • क्या उनके दिमाग में अंधेरी जगह जाने का डर बैठ सकता है?

ब्रिटेन यूनिवर्सिटी ने बताई हो सकती हैं कई परेशानियां

ब्रिटेन के किंग्स कॉलेज यूनिवर्सिटी में चाइल्ड साइकियाट्रिक्स डॉ. एंड्रिया डानेज़ी के का कहना है कि चूंकि ये बच्चे ज़िंदगी और मौत के बीच में झूलने वाली परिस्थिति से गुजरे हैं, इसलिए सुरक्षित बाहर आने के बाद भी उन्हें कुछ भावनात्मक परेशानियों का सामना कर पड़ सकता है।

डॉ. एंड्रिया डानेज़ी ने जताई इन समस्याओं की आशंका

  • डॉक्टर एंड्रिया के मुताबिक़ गुफा में लंबे समय तक बुरी तरह फंसने और मौत के मुंह से बाहर आए छात्रों में बात-बात पर रोने की समस्या देखी जा सकती है।
  • डॉक्टर एंड्रिया के मुताबिक, हो सकता है बच्चे पल भर के लिए भी अपने माता-पिता का साथ न छोड़ें।
  • इन बच्चों में डिप्रेशन, एंग्ज़ाइटी और पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर जैसी तकलीफ़ों की आशंका बढ़ जाती है।
  • लंबे वक़्त तक अंधेरी गुफा में फंसे रहने के कारण बच्चों को अंधेरे से नफ़रत की भावना पैदा हो सकती है।
  • किसी भी तरह से इन बच्चों के लिए रोजमर्रा की ज़िंदगी में वापस लौटना मुश्किल होगा।

सरकार करे मदद

सरकार को सभी बातों को ध्यान में रखते हुए इन बच्चों और उनके कोच को मनोवैज्ञानिक सलाह और मदद देना चाहिए। प्रोफ़ेशनल मनोवैज्ञानिक की सहायता से इन बच्चों को नकारात्मक विचारों में फंसे बिना अप्रिय स्थितियों का सामना करने में सहजता हासिल होगी।

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