मथुरा के मंदिर में नमाज पढ़ने वालों की जमानत अर्जी नामंजूर

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजू सिंह ने बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय महेन्द्र नाथ ने अपने आदेश में लिखा है कि दोनो अभियुक्तों फैजल खान और चांद मोहम्मद ने जो अपराध किया है वह अति गंभीर है

मथुरा: उत्तर प्रदेश में मथुरा की एक अदालत ने नन्दबाबा मन्दिर परिसर में नमाज पढ़ने के मामले दो आरोपियों की जमानत की अर्जी नामंजूर कर दी है।

दोनो अभियुक्तों की जमानत अर्जी खारिज

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजू सिंह ने बताया कि अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय महेन्द्र नाथ ने अपने आदेश में लिखा है कि दोनो अभियुक्तों फैजल खान और चांद मोहम्मद ने जो अपराध किया है वह अति गंभीर है तथा आजीवन कारावास की सजा देने की श्रेणी में आता है इसलिए दोनो ही अभियुक्तों की जमानत की अर्जी खारिज की जाती है।

जेल में बन्द अभियुक्त फैजल खान की जमानत की अर्जी पर मंगलवार को सुनवाई थी वहीं चांद मोहम्मद ने अग्रिम जमानत देने का प्रार्थनापत्र दिया था और वह अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। दोनो ही अभियुक्तों ने आलोक रतन और नीलेस गुप्ता के साथ 29 अक्टूबर को बरसाना थाना क्षेत्र के अन्तर्गत नन्दबाबा मन्दिर नन्दगांव में जाकर तथा पुजारी कान्हा से मिलने और दर्शन के बाद चुपचाप मन्दिर के सुनसान भाग में नमाज अदा की थी।

आरोपियों ने अगले दिन नमाज पढ़ने का फोटो को वायरल कर दिया था। फैजल को दिल्ली से 2/3 नवम्बर की रात गिरफ्तार किया गया था।

सहायक शासकीय अधिवक्ता सिंह ने बताया कि न्यायाधीश ने अभियुक्तों द्वारा स्वयं को खुदाई खिदमदगार संगठन का सदस्य बताकर लोगों को भ्रमित करने को भी गंभीरता से लिया है क्योंकि यह संगठन अब्दुल गफ्फार खान के निधन के बाद अस्तित्व में ही नही है।

पुलिस की पूछताछ में अभियुक्त फैजल का उसके एसबीआई के खाते में साढ़े 6 लाख मिलना और इस धनराशि की प्राप्ति का माध्यम न बता पाना भी शक के घेरे में न्यायाधीश ने माना है।

उधर अभियुक्त पक्ष के अधिवक्ता मधुबन दत्त चतुर्वेदी ने कहा कि वे अपने मुवक्किलों का पक्ष अदालत के सामने रखकर उन्हें संभवतः संतुष्ट नही कर सके जिससे जमानत की अर्जी नामंजूर कर दी गई है। अब वे उच्च न्यायालय में इसकी अपील करेंगे।

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