बही-खाते को पेश करने में शायरी और चाणक्य सूत्रों को बनाया आधार

वित्तमंत्री ने इस बही-खाते में रखा 5 ट्रिलियन $ इकोनॉमी का लक्ष्य

नई दिल्ली: वित्त मंत्री ने बताया कि 2014 में अर्थव्यवस्था 1.8 ट्रिलियन डॉलर थी. इसी कारण उन्होंने चाणक्य नीति और मंजूर हाशमी की शायरी का उदाहरण इसलिए दिया. क्योंकि वह इस बही-खाते को 2019 में 2.7 ट्रिलियन डॉलर को बढ़ाकर 5 ट्रिलियन डॉलर करना है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला आम बजट पेश कर रही हैं.

निर्मला सीतारमण ने कहा, ‘चाणक्य नीति कहती है- कार्य पुरुषा करे, ना लक्ष्यम संपा दयाते’ यानी इच्छाशक्ति के साथ किए प्रयासों से लक्ष्य जरूर हासिल कर लिया जाता है. इसके साथ ही निर्मला सीतारमण ने उर्दू की एक शायरी भी पढ़ी. उन्होंने कहा, ‘यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है’. ये शायरी उर्दू के मशहूर शायर मंजूर हाशमी की है जिसका मतलब है कि अगर आपको खुद पर यकीन हो तो हवा का सहारा लेकर भी चिराग जल जाता है.

वित्त मंत्री ने चाणक्य नीति और मंजूर हाशमी की शायरी का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि वह उस वक्त भारतीय अर्थव्यवस्था के 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य की बात कर रही थीं. उन्होंने बजट भाषण में बताया कि 2014 में अर्थव्यवस्था 1.8 ट्रिलियन डॉलर थी जो पांच साल में बढ़कर यानी 2019 में 2.7 ट्रिलियन डॉलर हो गई और अब इसे बढ़ाकर 5 ट्रिलियन डॉलर करना है. मोदी सरकार के इसी बड़े लक्ष्य को पूरा करने की प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने चाणक्य नीति और मंजूर हाशमी की शायरी का उदाहरण दिया.

Related Articles