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The Big Bull Review: Comedy मूवी में ही जमते हैं Abhishek Bachchan, यकिन नहीं होता तो पढ़ लिजिए

बॉलीवुड सुपरस्टार Abhishek Bachchan की फिलम 'The Big Bull' कल Hotstar Disney Plus पर रिलीज हुई। जिसे भी लगता है पिछले साल आई Webseries Scam 1992 की तुलना इस फिल्म 'The Big Bull' से होनी चाहिए तो बता दें, Scam 1992 के सामने यह फिल्म बौनी पड़ गई है।

लखनऊ: बॉलीवुड सुपरस्टार Abhishek Bachchan की फिलम ‘The Big Bull’ कल Hotstar Disney Plus पर रिलीज हुई। जिसे भी लगता है पिछले साल आई Webseries Scam 1992 की तुलना इस फिल्म ‘The Big Bull’ से होनी चाहिए तो बता दें, Scam 1992 के सामने यह फिल्म बौनी पड़ गई है। दोनों में कोई मुकाबला नहीं है। यहां कहानी 2020 में शुरू होती है, जब आर्थिक पत्रकार मीरा राव (Ileana D’Cruz) स्टॉक ब्रोकर से बिग बुल बने हेमंत शाह (Abhishek Bachchan) पर लिखी अपनी किताब के बारे में लोगों से बात कर रही है।

Abhishek Bachchan की फिल्मी ग्राफ

असल में यह फिल्म 1980-90 के दशक में भारतीय शेयर बाजार में तूफान लाने वाले हर्षद मेहता की कहानी है, जिसका लेखक-निर्देशक ने जिक्र नहीं किया है। वहीं अगर अभिषेक बच्चन के किरदार की बात करें तो उन्होनें अपना किरदार निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वह अभिनेता अच्छे हैं बशर्ते निर्देशक को उनके अभिनय की सीमाएं पता हो। वह ड्रामा फिल्मों में बढ़िया काम करते हैं। ‘गुरु’, ‘युवा’, ‘बंटी और बबली’, ‘सरकार’, ‘धूम’ और ‘मनमर्जियां’ जैसी फिल्में उनके अभिनय का एक ऐसा ग्राफ खींचती हैं, जिनमें उनको खुद को एक अभिनेता के तौर पर आगे ले जाने का प्रयास दिखता है।

इन फिल्मों के बीच तमाम फ्लॉप फिल्में भी हैं, लेकिन अपनी दूसरी पारी में अभिषेक एक बेहतर अभिनेता दिखने लगे हैं। फिल्म बताती है कि साधारण नौकरी करने वाला हेमंत रातोंरात शेयर ब्रोकर और फिर उससे बढ़कर बड़ी चीज बन जाता है। इतनी बड़ी कि लोग उसे शेयर मार्केट का अमिताभ बच्चन कहते हैं। मगर पत्रकार मीरा उसे सिर्फ एक बुलबुला बता कर सवाल उठाती है कि कौन हेमंत को अंडरवर्ड फंडिंग कर रहा है। हेमंत शेयर बाजार में कंपनियों के शेयर कैसे अपने इशारों पर गिरा-उठा रहा है। अखबारों में विज्ञापन दे रहा है। हर तरफ उसकी तारीफ है और देखते-देखते वह देश का सबसे बड़ा करदाता बन गया है।

भारतीय बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा

कहानी बताती है कि हेमंत कैसे भारतीय बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाते हुए, उनके पैसे का इस्तेमाल शेयर बाजार में करता है और बिचौलिया बन कर मुनाफा अपनी जेब में डालता है। जबकि बैंकों का पैसा शेयर मार्केट में लगाना गैर-कानूनी है। इस काम में वह कुछ बैंकवालों को भी साधे रहता है। उनकी जेबें गर्म करता है। मगर आखिर में घर के भेदी भाई (सोहम शाह) के कमजोर आत्मविश्वास और राजनेताओं की चालाकी का शिकार बन जाता है।

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आपको बता दें, इस फिल्म को कूकी गुलाटी ने निर्देशित किया हैं। कूकी के लिए ये उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट है और जी जान लगाकर उन्होंने फिल्म बनाई भी अच्छी है। फिल्म इससे कहीं बेहतर हो सकती थी अगर पटकथा में थोड़ी मेहनत और की जाती। साथ ही फिल्म की कास्टिंग भी थोड़ा धीरज धरकर की जाती।

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