बुराड़ी कांड में हुआ अब तक का सबसे बड़ा खुलासा, पढ़कर रह जाएंगे दंग

बुराड़ी कांडनई दिल्‍ली। दिल्‍ली के बुराड़ी कांड में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा सामने आया है। आपको बता दें कि दिल्‍ली के बुराड़ी में 11 लोगों ने एकसाथ आत्‍महत्‍या कर ली थी। इनमें से 10 लोंगों के शव घर में लटकते हुए पाए गए थे जबकि एक का शव घर में ही अलग पड़ा हुआ था। वहीं इस मामले में आए दिन कोई न कोई नया खुलासा होता जा रहा है।

घर से बरामद रजिस्‍टरों और नोटबुक में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं। रजिस्‍टर के एक पन्‍ने पर जो लिखा है उससे साफ जाहिर होता है कि मौत से पहले पूरी तैयारी हो चुकी थी। रजिस्‍टर से ही खुलासा हुआ है कि करीब एक हफ्ते पहले ही पूरी प्रक्रिया के बारे में परिजनों को बताया गया था।

रजिस्‍टर से मिली जानकारी के मुताबिक, सात दिन तक बड़ पूजा करनी है। थोड़ी श्रद्धा और लगन से। कोई घर में आ जाए, तो अगले दिन। बेबे भी खड़ी नहीं हो सकती तो अगले कमरे में लेट सकती है। पट्टियां अच्छे से बांधनी है। शून्य के अलावा कुछ नहीं। पहले हाथ प्रार्थना की मुद्रा फिर अनिशासन भाव की और शरीर को तार से लपेटना है। रस्सी के साथ सूती चुन्नी या साड़ी का प्रयोग ही करना है।

सबकी सोच एक जैसी हो। पहले से ज़्यादा दृढ़ता हो। स्नान करने की जरूरत नहीं है। मुंह हाथ धो कर भी ये करते ही तुम्हारे आगे के काम दृढ़ता होने शुरू होंगे। ढीलापन और अविश्वास नुकसानदायक होता है। श्रम, तालमेल और आपसी सहयोग जरूरी होता है। मंगल, शनि, वीर और इतवार फिर आऊंगा। विश्वास और दृढ़ता से करो। माध्यम रोशनी का प्रयोग करना है।

हाथ की पट्टी बचेगी उसे आंखों पर डबल कर लेना है। मुंह की पट्टी को भी रुमाल से डबल कर लेना है। जितनी दृढ़ता और श्रद्धा दिखाएंगे उतना उचित फल मिलेगा। जिस दिन ये प्रयोग करो तो फोन का प्रयोग कम से कम करना। मंगल और वीरवार आएंगे।

बुराड़ी कांड

एक चश्मदीद के मुताबिक पूरे परिवार ने उज्जैन के भृतहरि गुफा और गढ़कालिका क्षेत्र में तांत्रिक क्रियाएं की थी। जब तांत्रिक ने लाखों रुपये की डिमांड की तो भाटिया परिवार इतने पैसे नहीं दे पाया। इसके बाद तांत्रिक ने उनके परिवार के पतन का श्राप दे दिया था। तांत्रिक से विवाद होने के बाद भटिया परिवार दिल्ली लौट आया और घर में ही पूजा-पाठ शुरू कर दिया था।

पुलिस को बरामद रजिस्टर के एक पेज पर 9 जुलाई 2015 को लिखा गया था कि अपने सुधार में गति बढ़ा दो। यह भी तुम्हारा धन्यवाद करता हूं कि तुम भटक जाते हो पर फिर एक दूसरे की बात मानकर एक छत के नीचे मेल मिलाप कर लेते हो। 5 आत्माएं अभी मेरे साथ भटक रही हैं। यदि तुम अपने में सुधार करोगे तो उन्हें भी गति मिलेगी। इससे सबका फायदा होगा

क्राइम ब्रांच को 5 जून 2013 से 30 जून 2018 तक की डायरी मिली है। पुलिस को कुल 11 डायरियां मिली हैं। इनमें लिखी बातों से पुलिस इस नतीजे पर पहुंचती नजर आ रही है कि ये मामला कत्ल का नहीं है। डायरियों में तीन-चार तरह की लिखावट मिली है। कुछ लिखावट प्रियंका की है। ऐसा माना जा रहा है कि ललित बातों को प्रियंका नोट किया करती थी।

यह पूरा मामला बेहद नाटकीय तरीके से शुरू हुआ था। पिता की मौत के बाद दुकान पर ललित का झगड़ा हुआ था। हमलावरों ने उसे दुकान के अंदर बंद करके बाहर से आग लगा दी थी। ललित की जान तो बच गई लेकिन दहशत में उसकी आवाज चली गई थी। इस घटना से ललित व परिवार पूरी तरह टूट गया। कई साल तक ललित की आवाज नहीं लौटी थी।

एक रजिस्टर के मुताबिक ललित घर वालों को बताता था कि वो पिता की आत्मा से बात करता है। सूत्रों का कहना है कि ललित के सपने में एक दिन पिता आए और कहा कि वो चिंता न करे, जल्दी ही उसकी आवाज लौट आएगी। इस सपने को सुबह उठते ही उसने परिवार के साथ लिखकर साझा किया। फिर आए दिन सपने में ललित को अपने पिता दिखाई देने लगे।

कुछ दिनों बाद ललित की जब आवाज में सुधार हुआ तो उसकी अटूट आस्था शुरू हो गई। इसके बाद तो ललित अक्सर पिता की आत्मा से मिलने करने की करने लगा। वो जो कुछ कहता परिवार के लोग पिता का आदेश मानकर पूरा करते। इत्तफाक देखिये। ललित की बहन की मांगलिक प्रियंका की शादी में अड़चनें आ रही थी। पूजा-पाठ के बाद उसकी शादी तय हो गई।

यही नहीं, पहले भाटिया परिवार के पास तीन दुकानें हो गई। बताया जाता है कि पूरा परिवार इसका श्रेय पिता के बताए रास्ते को देता था और ललित इसका माध्यम था। इसलिए परिवार के लोग ललित को पिता की तरह सम्मान देते थे। उस रोज जो प्रक्रिया अपनाई जा रही थी, उसके पीछे मकसद परिवार को मिली खुशियों के लिए ईश्वर का धन्यवाद ज्ञापन करना था।

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