सबसे बड़ा सर्वे आया सामने, अगर अभी हो जाएं लोकसभा चुनाव तो चली जाएगी मोदी सरकार

अगले लोकसभा चुनाव होने में अभी समय बाकी है, लेकिन एक सर्वे में यह सामने आया है कि बीजेपी की सरकार पर असर पड़ सकता है। भारत की दमदार पार्टी कही जाने वाली भारतीय जनता पार्टी के लिए सर्वे में ऐसा खुलासा हुआ है जिसे सुन (बीजेपी) समर्थकों की हवाइयां उड़ जाएंगी। जी हां, इंडिया टुडे और कार्वी इनसाइट्स ने “मूड ऑफ द नेशन” नाम से एक सर्वे किया गया है जिसमें तीन राजनीतिक स्थितियों के मद्देनजर रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इन रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर आज लोकसभा चुनाव कराए जाए तो मोदी सरकार को मात मिल सकती है।

सबसे बड़ा सर्वे आया सामने, अगर अभी हो जाएं लोकसभा चुनाव तो चली जाएगी मोदी सरकार

इस सर्वे में वजह भी साफ बताई गई है कि कांग्रेस ने सपा, बसपा और तृणमूल कांग्रेस से चुनाव पूर्व गठबंधन कर लिया तो भाजपा की अगुवाई वाली एनडीए गठबंधन को बहुमत मिलना बहुत ही मुश्किल हो जाएगा। जिससे अगर आज की तारीख में ही चुनाव करा दिया जाए तो बीजेपी को शिकस्त मिल सकती है।

इस सर्वे के मुताबिक कांग्रेस और उसकी अगुवाई में यूपीए का न सिर्फ वोट प्रतिशत बढ़ता दिख रहा है बल्कि 2014 की तुलना में सीटें भी बढ़ती हुई दिख रही हैं। पहली राजनीतिक स्थिति, यानी 2014 की राजनीतिक स्थिति रहती है तो एनडीए गठबंधन को 281 सीटें मिल सकती हैं, जबकि यूपीए गठबंधन को 122 सीटें और अन्य को 140 सीटें मिल सकती हैं। अगर हम बात करें वोट परसेंट की तो एनडीए को 36 फीसदी, यूपीए को 31 फीसदी और अन्य को 33 फीसदी वोट मिल सकते हैं।

बता दें कि 2014 की इस सियासी सूरत में सपा, बसपा और तृणमूल कांग्रेस यूपीए में शामिल नहीं है। 2014 में 23 दलों के गठबंधन एनडीए को 336 सीटें मिली थीं। इनमें से बीजेपी को अकेले 282 सीटें हासिल हुई थीं। कांग्रेस को मात्र 44 सीटें मिली थीं जबकि 12 दलों वाले उसके गठबंधन यूपीए को मात्र 60 सीटें मिली थीं। साढ़े चार साल बाद उसी यूपीए गठबंधन को दोगुनी (62 ज्यादा) सीट मिलती दिख रही है, जबकि एनडीए को 55 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है।

सर्वे में कॉंग्रेस की राजनीतिक स्थिति जगजाहिर की है इस स्थिति में अगर कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन यूपीए में यूपी की समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) जुड़ जाती है तो एनडीए का वोट शेयर (36 फीसदी) तो कम नहीं हो सकता है मगर सीटें घटकर 228 हो सकती हैं।

यानी, एनडीए को कुल 108 सीटों का नुकसान हो सकता है जबकि यूपीए की सीटें बढ़कर 224 हो सकती हैं और वोट प्रतिशत भी बढ़कर 41 फीसदी हो सकता है। यानी यूपीए को 164 सीटों का फायदा हो सकता है। अन्य के खाते में 92 सीटें और 23 फीसदी वोट जा सकते हैं। यहां गौर करने वाली बात है कि एनडीए और यूपीए की बीच मात्र चार सीटों का अंतर रह सकता है।

तीसरी राजनीतिक स्थिति दक्षिण के क्षेत्रीय दलों के गठबंधन पर आधारित है। सर्वे में बताया गया है कि अगर एनडीए ने तमिलनाडु की सत्ताधारी दल एआईएडीएमके और आंध्र प्रदेश की विपक्षी पार्टी वाईएसआर कांग्रेस को साथ कर लिया और कांग्रेस ने टीडीपी और जम्मू कश्मीर की पीडीपी को साथ कर लिया तो एनडीए के सीटों का आंकड़ा बढ़कर 255 तक पहुंच सकता है और वोट शेयर भी 41 फीसदी हो सकता है। इस स्थिति में यूपीए का आंकड़ा 242 सीट और वोट शेयर 43 फीसदी तक जा सकता है। अन्य के खाते में 46 सीटें और 16 फीसदी वोट के आसार जताए गए हैं। इस सियासी सूरत में भी लोकसभा त्रिशंकु रह सकते हैं।

सर्वे के मुताबिक अगर तेलंगाना की टीआरएस और ओडिशा की बीजेडी ने चुनाव बाद एनडीए का दामन थामा तो एनडीए का आंकड़ा 282 तक पहुंच सकता है जो बहुमत से थोड़ा ज्यादा है। सर्वे में कहा गया है कि अगर वाम दलों ने यूपीए का साथ दिया तो राजनीतिक समीकरण थोड़ा गड़बड़ हो सकता है। हालांकि, सभी जोड़-तोड़ के बावजूद एनडीए सबसे बड़ा गठबंधन रह सकता है और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी रह सकती है। सर्वे के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी अभी भी 49 फीसदी लोगों की पसंद के साथ प्रधानमंत्री पद के सबसे लोकप्रिय चेहरे बने हुए हैं। राहुल गांधी को 27 फीसदी लोगों ने पसंद किया है। सर्वे में कहा गया है कि इस साल के अंत तक होने वाले तीन राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान) के विधान सभा चुनावों में दो राज्यों में कांग्रेस वापसी कर सकती है।

तो सर्वे में इस तरह से स्टडि की गई है कि मोदी सरकार पर इस तरह और ऐसा असर देखा जा सकता है।

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