मदर टेरेसा से भारत रत्न वापसी का BJP सांसद ने किया समर्थन, कहा- किताब में दर्ज हैं उनके फ्रॉड

नई दिल्ली: झारखंड के तुली में नवजात बच्चों को बचने के आरोप के बाद चर्चा में आई मदर टेरेसा की संस्था ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ को लेकर विवाद शुरू हो गया है। एक ओर जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे बीजेपी की साजिश बताया है, वहीं आरएसएस नेता राजीव तुली के मिशनरीज द्वारा चाइल्ड ट्रैफिकिंग का दोषी पाए जाने पर मदर टेरेसा से भारत रत्न की उपाधि वापस लेने के बयान का बीजेपी ने समर्थन किया है।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और सांसद सुब्रमण्यन स्वामी ने एक मीडिया चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि “वह 100 प्रतिशत आरएसएस नेता की बात का समर्थन करते हैं।” स्वामी ने तर्क देते हुए कहा कि “ब्रिटिश लेखक क्रिस्टोफर हर्चेन्स ने अपनी किताब “द मिशनरीज पोजिशनः मदर टेरेसा इन थ्योरी एंड प्रैक्टिकल” में मदर टेरेसा के किये सभी फ्रॉड को डॉक्यूमेंटिड किया है।”

स्वामी ने बताया कि “जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं, तो उन्होंने सभी सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र नॉर्वे की नोबेल सोसाइटी को भेजकर मदर टेरेसा को नोबेल से पुरस्कृत करने की मांग की थी, लेकिन उस वक्त भी उन्होंने उस पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया था। सुब्रमण्यन स्वामी ने मदर टेरेसा के जनकल्याण के कामों को प्रोपेगैंडा करार दिया।

भाजपा नेता ने बताया कि जब वह 80 के दशक में हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाते थे, उस वक्त कैलिफॉर्निया की एक अदालत के एक जज को मदर टेरेसा ने पत्र लिखकर एक अपराधी को छोड़ने की अपील की थी। स्वामी के अनुसार, उस अपराधी को बाद में अदालत ने 150 साल की सजा सुनायी थी और उस पर लाखों लोगों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप था।

वहीं चर्च ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी पर लग रहे आरोपों को बदनाम करने की साजिश बताया है. इस पर स्वामी ने कहा कि मिशनरीज पर आरोप वह नहीं, बल्कि वहीं के लोग लगा रहे हैं। स्वामी के मुताबिक, मदर टेरेसा के खिलाफ अपराध के कई उदाहरण हैं, फिर उन्हें हमारे समाज में नोबेल व्यक्ति के तौर पर क्यों सेलिब्रेट किया जाता है?

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