एसडीएम बतायें अपना अधिकार

विवादित दुकान-मकान गिराने गए एसडीएम को हाईकोर्ट ने किया तलब, पूछा उनका अधिकार

इलाहाबाद।  हाईकोर्ट ने सदर झांसी स्थित एक विवादित मकान और उसमें बनी दुकान को गिराने गए एसडीएम सदर को कोर्ट में तलब कर लिया है। कोर्ट ने एसडीएम से पूछा है कि वह बताएं की किस कानून में उन्हें अधिकार मिला है कि वह विवादित मकान को गिरा दें या किसी और को उसका कब्जा दे दें। यह आदेश हाई कोर्ट के दो जजों की खंडपीठ ने ने दिया है।
क्‍या है मामला
सर्राफा बाजार झांसी में एक मकान और दुकान को लेकर दो प्राइवेट पक्षों, मनोरमा कोडरिया और बाबूलाल के के बीच विवाद चल रहा था। मनोरमा कोडरिया ने झांसी के दीवानी कोर्ट में सिविल वाद भी दायर कर रखा था। उनका कहना था कि रजिस्ट्री के आधार पर वह विवादित मकान और दुकान की मालिक है। जबकि, दूसरे पक्ष बाबूलाल का कहना था कि विवादित मकान और दुकान उसने साल 1959 में खरीदा था।
एसडीएम सदर पहुंचे कब्‍जा दिलाने निचली अदालत ने मनोरमा कोड़रिया का दावा खारिज कर दिया था। मनोरमा का दावा खारिज होने के बाद एसडीएम सदर झांसी दूसरे पक्ष बाबूलाल की मांग पर उस विवादित मकान पर कब्जा कराने पहुंच गए। विरोध के चलते पुलिस एकत्र हो गई और पुलिस ने मनोरमा को तीन दिन का वक्त लोअर कोर्ट के आदेश के खिलाफ स्टे आर्डर लेने के लिए दिया।
य‍था स्थिति बनाए रखने का आदेश
मनोरमा ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर सभी तथ्यों से कोर्ट को अवगत कराया। इसपर हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि विवादित मकान और दुकान पर यथा स्थिति बनी रहेगी, लेकिन कोर्ट ने एसडीएम सदर को यह कहते हुए तलब कर लिया कि वह आगामी 11 जनवरी 2015 को कोर्ट में हाजिर होकर बताए कि किस कानून में उन्हें यह अधिकार प्राप्त था कि वह विवादित मकान और दुकान का कब्जा दखल कराएं।

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