जम्मू-कश्मीर की बिटिया बनी पहली महिला बस ड्राइवर, सालों का सपना हुआ पूरा

पूजा देवी जम्मू-कश्मीर की पहली महिला बस ड्राइवर बन गईं हैं और इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में रहने वाली पूजा देवी प्रदेश की पहली महिला बस ड्राइवर बन गईं हैं।

नई दिल्ली : हमारे समाज में महिलाओं की जब बात होती है तो अक्सर ऐसा होता है कि हम कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग करते हैं जो उनके व्यक्तित्व को कमज़ोर साबित करता है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है ? क्या महिलाएं वाकई कमज़ोर हैं ? नहीं ऐसा बिलकुल भी नहीं है और इस सबूत महिलाएं हमेशा से देती आई हैं।

फिर चाहे वो रज़िया सुल्तान हों या इंदिरा गाँधी, किरन बेदी हों या सुष्मा स्वराज, पी टी उषा हों या मैरी कॉम, बरखा दत्त हों या कल्पना चावला, सीमा समृद्धि हों या लक्ष्मी अग्रवाल और ऐसे न जाने कितने ही नाम हैं जिन्होंने ये साबित किया है कि महिलाएं किसी मायने में पुरुषों से कम नहीं हैं। बल्कि कंधे से कन्धा मिलाकर बखूबी जानती हैं। बता दें कि ऐसा ही कुछ जम्मू कश्मीर की पूजा देवी ने भी किया है। पूजा देवी जम्मू-कश्मीर की पहली महिला बस ड्राइवर बन गईं हैं और इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं।

पूजा देवी से पहले किसी महिला ने नहीं चलाई थी यात्री बस

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में रहने वाली पूजा देवी प्रदेश की पहली महिला बस ड्राइवर बन गईं हैं। जम्मू-कठुआ रोड पर वह यात्री बस चलाती हैं। बता दें कि जम्मू -कश्मीर में उनसे पहले किसी महिला ने आज तक यात्री बस नहीं चलाई थी। पांच साल पहले शौकिया तौर पर ड्राइविंग सीखने वाली पूजा देवी का सपना था कि वह एक दिन बड़ी गाड़ी को चलाएं और बुद्धवार सुबह को पूजा का यह सपना पूरा हो गया।

बुद्धवार को जम्मू से कठुआ और कठुआ से जम्मू के बीच चलने वाली एक बस का स्टीयरिंग पूजा देवी के हाथ में था। जहाँ एक तरफ पूजा को देखकर लोग हैरान थे तो वहीं दूसरी तरफ पूजा के चेहरे पर बस चलाने की ख़ुशी साफ़ झलक रही थी। शुरुआत से एक ड्राइविंग ट्रेनर रहीं पूजा देवी ने पेशेवर ड्राइवर बनने के अपने जुनून के कारण इस पेशे को अपनाया था और आज वह अपने परिजनों को गौरवान्वित कर रही हैं। आसपास के लोग और पूजा के घरवाले जो एक समय पर उनके इस प्रोफेशन पर ऐतराज़ जाता रहे थे आज तारीफ के पुल बाँध रहे हैं।

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परिवार में झेलना पड़ा विरोध

कठुआ जिले के सुदूर संधार-बसोहली गांव में पली-बढ़ी 30 साल की पूजा ने कहा कि उसे ड्राइविंग का शौक था और वह तब से कार चला रही थीं जब वह एक टीनएजर थीं। उनके मन में भारी वाहन चलाने की इच्छा शुरुआत से ही थी और वो सपना अब जाकर पूरा हुआ। बस ड्राइवर बनने के फैसले पर उन्हें अपने ही परिवार में विरोध भी झेलना पड़ा। पूजा ने कहा, परिवार के सदस्य और ससुराल वाले पेशे के खिलाफ थे, लेकिन उनके विरोध के बावजूद उन्होंने पेशेवर ड्राइवर बनने के अपने सपने को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

जब पूजा से यह पुछा गया कि उन्होंने इस पेशे को क्यों चुना, पूजा ने जवाब दिया कि अगर महिलाएं पायलट, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी हो सकती हैं और अन्य रूप में काम कर सकती हैं, तो वे पेशेवर ड्राइवर क्यों नहीं बन सकतीं। पूजा ने कहा, ”हर पड़ाव पर, लोग मेरा स्वागत करते हैं और मेरे फैसले की सराहना करते हैं। मुझे लोगों और अन्य ड्राइवरों से बहुत स्नेह मिला है।

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