जेल में बंद हुर्रियत नेता की बेटियों ने पीएम को लिखा खत, कहा- पिता की जान को है खतरा, लगता है अनाथ हो गये हैं

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श्रीनगर: कश्मीर में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता शाहिद उल इस्लाम की बेटियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस खत में दोनों बेटियों ने अपने पिता को जेल से रिहा करने की अपील की है। दरअसल, अलगाववादी नेता शाहिद की दोनों बेटियां सुजैन और सुंदास मिशनरी स्कूल में पढ़ती हैं। पीएम को लिखे खत के मुताबिक, वह पिता के जेल में बंद होने के कारण उनकी काफी कमी महसूस कर रही हैं। मोदी को भेजे अपने खत में बेटियों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ नारे का भी जिक्र करते हुए लिखा- जिस देश में प्रधानमंत्री के नारे से मजबूर बेटियों के मन में उम्मीद की किरण जागी है, उसी देश में हम अपनी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। पिता के बिना हम अनाथ हो गये हैं और घर एक जेल की तरह लगने लगा है।

जेल में क्यों बंद हैं शाहिद उल इस्लाम

दरअसल, कश्मीर में आतंकी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए पाकिस्तानी फंडिंग के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) ने शाहिद उल इस्लाम को गिरफ्तार किया है। वह पिछले एक साल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। शाहिद अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता हैं। शाहिद की बेटियों ने लिखा, “हमारे लिए घर कैदखाना हो गया है। जब से पिता जेल गए हैं, उन पर लगा कोई भी आरोप साबित नहीं हुआ है। हम उम्मीद करते हैं कि प्रधानमंत्री नेकदिली दिखाते हुए इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करेंगे। पिछले 11 महीनों से हमारा जीवन अनाथों जैसा हो गया है, क्योंकि हम अपने प्यारे पिता को देख भी नहीं पा रहे हैं।”

पिता की हालत देख पहचान नहीं पाये

बेटियों ने अपने में खत में पिता से जेल में मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि जेल में मुलाकात के दौरान हमने उन्हें बुरी हालत में देखा। हमारे और उनके बीच शीशे की मोटी दीवार थी। उन्हें छूने की बात तो दूर, हमारी आवाज भी उन तक नहीं पहुंच पा रही थी। हम बड़ी मुश्किल से उन्हें पहचान पा रहे थे। शुगर, हाईपरटेंशन, आर्थराइटिस से परेशान पिता का वजन करीब 15 किलो घट गया था।

पिता की जिंदगी को है खतरा

अपने खत में बेटियों ने यह भी लिखा, “हमारे पिता को अपराधियों, नशेड़ियों के साथ रखा गया है, जिससे उनकी जिंदगी को खतरे में है। हमारी उनसे मुलाकात भी आतंकित कर देने वाले महौल में हुई। जब इंटरकॉम पर हम अपनी बात खत्म करने वाले थे, तब लाइन अचानक कट गई और बिजली गुल हो गई। कोई चीखा- वक्त खत्म हो गया है। हम अपने पिता को अलविदा भी नहीं कह पाए।

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