‘एंट्री-एग्जिट पॉलिसी’ से छूटी हुई डिग्री की पढ़ाई कर सकेंगे वही से फिर शुरू

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नई दिल्ली। कई बार अक्सर होता हैं कि किसी कारणवश डिग्री की पढाई बीच में छोडनी पड़ जाती हैं। फस्ट ईयर करने के बाद बीच में पढाई छोड़ कुछ सालो का अंतर हो जाता हैं। अब अगर आप बीए फस्ट ईयर करने के बाद स्टडी छोड़ चुके थे और अब फिर से बीए के आगे सेकेंड ईयर में ऐडमिसन लेना हैं तो अब आपको डायरेक्ट सेकेंड ईयर में ऐडमिसन मिलेगा।एंट्री-एग्जिट पॉलिसी

फस्ट ईयर दोबारा नहीं पढना पड़ेगा। अब इसके लिए नई एजुकेशन पॉलिसी ‘एंट्री-एग्जिट पॉलिसी’ आ सकती है। पॉलिसी तय होने के बाद जब कोई फर्स्ट ईयर करेगा तो उसे सर्टिफिकेट इन आर्ट या इसी तरह का सर्टिफिकेट मिल सकता है। बाद में पढ़ाई जारी रखने पर सेकंड ईयर से पढ़ना होगा।

नई एजुकेशन पॉलिसी के लिए संघ के संगठन भारतीय शिक्षण मंडल ने कुछ सुझाव दिए थे। उन सुझाव में एक सुझाव ये भी हैं। भारतीय शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री मुकुल कानितकर ने बताया कि इस सुझाव पर सभी एक्सपर्ट एक साथ सहमत दिखे। इसलिए हमें उम्मीद है कि यह एंट्री-एग्जिट का सुझाव किसी न किसी रूप में नई एजुकेशन पॉलिसी में शामिल होगा। एचआरडी मिनिस्ट्री ने बताया कि इस मसले पर एजुकेशन पॉलिसी के लिए बनी कमिटी ने आपस में बहुत चर्चा की और सभी सदस्यों को यह सुझाव जरूरी लगा।

कानितकर ने कहा कि इस सुझाव के मुताबिक, अगर कोई बीएससी फर्स्ट ईयर पास करता है तो उसे सर्टिफिकेट इन साइंस दिया जाए। सेकंड ईयर पास करने पर डिप्लोमा इन साइंस, थर्ड ईयर पास करने पर बीएससी पास और फोर्थ ईयर के बाद बीएससी ऑनर्स या ग्रैजुएशन की डिग्री दी जाए। इस तरह अगर चार साल में ग्रैजुएशन की डिग्री मिलती है तो पांचवें साल में सीधे एमएससी यानी मास्टर्स इन साइंस की डिग्री मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि जो 4 साल के ग्रैजुएशन की चर्चा चल रही है वह दरअसल यह सुझाव है कि हर साल में एग्जिट और एंट्री पॉलिसी हो और इस तरह हो कि अगर चार साल में ग्रैजुएशन होता है तो फिर एक साल बाद मास्टर्स हो जाए। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि नई एजुकेशन पॉलिसी में यह किसी न किसी रूप में शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए करिकुलम को भी उसी हिसाब से बदलना होगा ताकि हर एक साल की पढ़ाई कर एग्जिट करने वाले स्टूडेंट्स किसी न किसी जॉब की योग्यता रखते हों।

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