भारत-नेपाल के बिगड़ते रिश्तों ने सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की बढ़ाई चिंता

भारत-नेपाल के तराई क्षेत्र में रहने वाले मधेशी व भारतीय लोगों के बीच रोटी बेटी का संबंध है। दोनों देशों के बिगड़ते रिश्तों के बीच इनको आवागमन पर प्रतिबंध लगने का डर सताने लगा है। सबसे ज्यादा डर उन परिवारों को है, जिन्होंने अपने बेटे या बेटियों की शादियां इन दोनों देशों में की है।

नेपाल में संपत्ति के मालिक भी हैं तमाम भारतीय नागरिक

नेपाल सीमा से सटे ग्राम मिश्रौलिया निवासी बिस्मिल्लाह ने बेटी की शादी नेपाल के बटसार महेशपुर जिला नवलपरासी में की है। पहले दोनों देशों में लॉकडाउन और अब नेपाल से बिगड़ते रिश्ते के कारण उनकी बेटी कई महीने से मायके नहीं आ सकी है। अब डर सता रहा कि कहीं आने जाने पर प्रतिबंध न लग जाए। सीमावर्ती बहुआर बाजार में आभूषण की दुकान करने वाले अंबरीश वर्मा का कहना है कि कभी ऐसा नहीं लगा कि भारत नेपाल अलग हैं। उनके ज्यादातर ग्राहक नेपाल के ही हैं। बिगड़ते रिश्तों को देखकर दुख होता है।

भारत व नेपाल के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध है। दोनों देशों के लोगों के बीच व्यापारिक व सामाजिक संबंध भी व्यापक है। सीमा पर स्थिति पूरी तरह से सामान्य है। – डा. उज्ज्वल कुमार, डीएम, महराजगंज 

23 मार्च से सील है सीमा

कोरोना संक्रमण के चलते बीते 23 मार्च से भारत-नेपाल सीमा सील है। सोनौली सीमा के रास्ते सिर्फ मालवाहक ट्रकों को आवागमन की अनुमति है। महराजगंज जिले से लगा ठूठीबारी, झुलनीपुर, बरगदवा व परसामलिक बार्डर पूर्ण रूप से बंद है। विदेशी नागरिकों का आवागमन भी प्रतिबंधित है। सिर्फ भारत व नेपाल में फंसे एक-दूसरे देश के लोगों को आवश्यक शर्तों के साथ प्रवेश की अनुमति दी जा रही है।

भारत व नेपाल के बीच 2009 में हुई थी व्यापार संधि

वर्ष 2009 में आपसी व्यापार को लेकर भारत व नेपाल के बीच संधि हुई थी। नेपाल के तत्कालीन वाणिज्य व आपूॢत मंत्री राजेंद्र महतो व भारत सरकार के तत्कालीन वाणिज्य व उद्योग मंत्री आनंद शर्मा के बीच हुई संधि में तय हुआ था कि सीमा सील होने के बाद भी व्यापारिक संबंध प्रभावित नहीं होंगे। मालवाहक वाहनों का आवागमन जारी रहेगा।

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