विदेशों की खोज ने दुनिया भर को छकाया, कोरोना के बाद पेगासस ने सबको हिलाया

लखनऊ: पेगासस (Pegasus) को लेकर इन दिनों हर जगह चर्चा है ओर सड़क से लेकर सदन तक इसपर हंगामा हो रहा है। पेगासस एक जासूसी सॉफ्टवेयर है, जिसे इजरायली की कंपनी एनएसओ द्वारा सुरक्षा के ख्याल से तैयार किया गया है। पेगासस (Pegasus Software) एक बार अपने लक्ष्य (Target) फोन या कंप्यूटर में इंस्टॉल हो जाता है, लेकिन इंस्टाल होने के बाद ये डिलीट नहीं होता है। कोई भी री-सेटिंग या री-बूटिंग इस सॉफ्टेवयर को डिवाइस से मिटा नहीं सकती है।

न्यूज़ वेबसाइट ‘द वायर’ ने बताया है कि पेगासस ने मानो भारत पर आक्रमण कर दिया है और 50,000 नंबरों का एक डेटाबेस लीक हुआ है, इनमें 300 से ज़्यादा नंबर भारतीय लोगों के हैं। द वायर के सहसंस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने पेगासस मामले पर बताया है कि इस सॉफ्टवेयर के कारण आपकी निजता का उल्लंघन हुआ है। भारत मे ये एक ऐसी जबरन घुसपैठ है जिस पर यकीन करना बहुत मुश्किल है, किसी को कभी ये दिन देखना न पड़े।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ सिद्धार्थ वरदराजन भी दुनिया भर के उन कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, राजनेताओं और वकीलों में शामिल हैं जो जासूसी सॉफ़्टवेयर ‘पेगासस’ का शिकार हुए है। खबरों के मुताबिक, एनएसओ ग्रुप ये स्पाईवेयर अलग-अलग देशों की सरकारों को बेचती है। इस मामले पर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सॉफ्टवेयर लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और किसी लोकतंत्र में इस तरह की जासूसी की अनुमति नहीं है।

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