सावन का पहला सोमवार: मंदिरों में उमड़ा शिवभक्तों का सैलाब, बेलपत्र चढ़ाते वक्त बरतें ये सावधानी

नई दिल्ली। आज सावन का पहला सोमवार है, सभी भक्त शिव को प्रसन्न करने के लिए मंदिर जा रहे है। कहते है सावन के दिनों में भगवान विष्णु विश्राम पर चले जाते हैं और उनका कार्यभार भगवान शंकर संभालते हैं, इसलिए सावन के दिनों में शिव की पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। भगवान शिव की पूजा में बेल की पत्तियों का अलग ही महत्व माना जाता है, बिना बेलपत्र के भगवन शिव की पूजा को पूरा नहीं माना जाता है।

बेलपत्र के दैवीय प्रयोग के अलावा औषधीय प्रयोग भी होते हैं, इसके प्रयोग से तमाम बीमारियाँका इलाज संभव है। सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा बेलपत्र के साथ करने से चमत्कारी परिणाम मिलते है।

बेलपत्र का चुनाव कैसे करें और इसके प्रयोग की सावधानियां क्या हैं?

एक बेलपत्र में तीन पत्तियाँ होनी चाहिए।

पत्तियाँ टूटी हुई न हों और उनमे छेद भी नहीं होना चाहिए।

बेलपत्र जब भी शिव जी को अर्पित करें, चिकनी तरफ से ही चढाएं।

एक ही बेलपत्र को जल से धोकर बार बार भी चढ़ा सकते हैं।

बिना जल के बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए, जब भी बेलपत्र अर्पित करें साथ में जल की धारा जरूर चढ़ाएं।

अगर विवाह में काफी विलम्ब हो रहा हो तो कैसे करें बेलपत्र का प्रयोग

108 बेलपत्र ले लें

हर बेलपत्र पर चन्दन से “राम” लिखें

“ॐ नमः शिवाय” कहते हुये बेलपत्र को शिव लिंग पर चढाते जाएँ।

जब 108 बेल पत्र चढ़ा लें तो शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें।

यह प्रयोग सावन में विशेष फलदायी होता है।

अगर स्वास्थ्य की गंभीर समस्या हो तो बेलपत्र का कैसे प्रयोग करें?

सावन में किसी भी दिन 108 बेलपत्र ले लें।

एक पात्र में चन्दन का इत्र ले लें।

अब एक एक बेलपत्र चन्दन में डुबाते जाएँ और शिवलिंग पर अर्पित करते जाएँ।

हर बेलपत्र के साथ “ॐ हौं जूं सः” कहें।

इसके बाद शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना करें।

अगर संतान न हो पा रही हो तो बेलपत्र का कैसे प्रयोग करें?

उतने बेलपत्र ले लें, जितनी आपकी उम्र है।

एक पात्र में दूध ले लें।

एक एक बेलपत्र दूध में डुबाते जाएँ और शिवलिंग पर अर्पित करें।

हर बेलपत्र के साथ “ॐ नमो भगवते महादेवाय” कहें

इसके बाद संतान प्राप्ति की प्रार्थना करें।

यह प्रयोग सावन में किसी भी दिन करें।

बेलपत्र के छोटे छोटे आयुर्वेदिक प्रयोग

आँखों की ज्योति बढ़ाने के लिए, बेल के पत्तों का रस आँखों में टपकाने से राहत मिलती है।

कफ से राहत पाने के लिए बेल के पत्तों का काढ़ा शहद में मिलाकर पीना उत्तम होता है।

बेलपत्र के ग्यारह पत्तों का रस निकालकर सुबह सुबह पीने से, कितना ही पुराना सर दर्द क्यों न हो, ठीक हो जाता है।

 

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