धोखाधड़ी के खेल में शामिल हुआ डाक विभाग

इलाहाबाद। आनलाईन सेवा उपलब्ध करवा रही प्राइवेट कम्पनियों में धोखाधड़ी का खेल तो आपने खूब सुना होगा। अच्छी सर्विस देने की बात कर रहा  डाक विभाग भी इस खेल में शामिल हो गया इसकी जानकारी शायद आपको नहीं होगी।  डाक विभाग की सेवाओं का उपयोग करने वाले लोग निश्चिंत भाव से बैठ जाते हैं और आंखें बंद कर विश्वास कर लेते हैं की कुछ गलत नहीं होगा, तो अब ऐसे लोगों को सचेत होने की दरकार है।

सास ने भेजा मोबाइल मिला केवल केबल

धूमनगंज निवासी 30 वर्षीय मंदीप सिंह को उनकी सास ने दिल्ली में 12 हजार का मोबाइल खरीदा। इसके बाद सास ने 14 दिसंबर को कीर्ति नगर दिल्ली स्थित डाक विभाग से धूमनगंज डाक विभाग से दामाद के नाम पार्सल कर दिया गया। 16 दिसंबर को जब वह डाक विभाग पहुंचा तो उसे वहां के कर्मचारियों ने पार्सल नहीं आने की बात कहते हुए लौटा दिया। इसके बाद मंदीप ने इंटरनेट पर अपने पार्सल की स्थिति देखी तो उसमें पार्सल विभाग पहुंचा हुआ दिखा रहा  था।

मंदीप ने इसकी जानकारी डाक विभाग के कर्मचारियों को दी। तब कर्मचारियों ने  उसे मोबाइल का डिब्बा पकड़ाया। युवक को डिब्बा हल्का लगा तो उसने सभी के सामने उसे खोला। डिब्बा खाली देखते ही मंदीप के होश उड़ गए। उसकी शिकायत जब डाक विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों से की तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया हमारा काम था पार्सल देना। हमने पार्सल दे दिया इसके बाद हमारी जिम्मेदारी खत्म। इस पर मंदीप ने पार्सल के तौल की बात कही। जिस पर कर्मचारियों ने तौलने की कोई चीज नहीं होने की बात कहते हुए उसे वहां से भगा दिया। परेशान मंदीप ने   धूमनगंज थाने में  मामला दर्ज कराई।

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