महीने में चार दिन जानवारों के साथ रात बिताती है यहां की लड़कियां

बघेश्वर। उतराखंड जिले में आज भी एक ऐसी परम्परा है जिसके कारन लड़कियों को महीने में 4 या पांच दिन जानवरों के साथ गुजरना पड़ता हैं। इसके पीछे की वजह हमारे समाज की पुराणी धकियानूसी विचारधारा है जिससे अभी तक हम बहार नहीं निकल पा रहे है। पुरखों द्वारा बनाये गए रिवाजों का अम्ल अभी अभी तक कर रहें है।

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दरअसल बघेश्वर के मल्ला दानपुर में आज भी मासिक धर्म के दौरान भेदभाव किया जाता है। उनके साथ आज भी छुआछूत किया जाता है। इन गांवो में मासिक धर्म होने पर महिलाओं और किशोरियों को जानवरों के गोठ में रखा जाता है। उनको कम से कम चार रातें गौशाला में गुज़ारना पड़ता है। मल्लापुर गांव में ज्यादातर वर्ग पढ़ा लिखा है सभी शिक्षित है। इस गांव के लोग देश के कोने कोने में कार्यरत है। लकिन ग्राम्य समाज आज भी रूढ़िवादी परंपरा से बाहर नहीं निकल सका है।

उच्च हिमालय के करीब होने के कारण इस क्षेत्र में आठ महीने तक कड़ाके की ठण्ड पड़ती है। ऐसे में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान बिना गर्म कपड़ों में गौशाला में सर्द राते गुजारनी पड़ती है। कई घरों में तो महिलाएं दिन में प्रवेश कर सकती हैं लकिन कुछ घर ऐसे भी है जहा पुरे मासिम धर्म के दौरान घर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है।

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