जानिये देश में कौन सा ग्लेशियर सबसे तेजी से पिघल रहा है

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देहरादून। वायुमंडल में हो रहे बदलाव और प्रदूषण का असर हर कहीं देखा जा रहा है। हिमालय में स्थित ग्लेशियर भी इससे अछूते नहीं हैं। हाल ही में देश के साथ ही उत्तराखंड के ग्लेशियर्स के पिघलने को लेकर केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने चिंता जताई थी। वहीं उत्तराखंड के वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की रिसर्च में भी ये बात सामने आयी है कि प्रदेश में ग्लेशियर 10 मीटर सालाना की औसत दर से पीछे खिसक रहे हैं। इनमें भी सबसे तेज 20 मीटर की दर से गंगोत्री ग्लेशियर खिसक रहा है।

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वाडिया संस्थान के वरिष्ठ ग्लेशियोलॉजिस्ट (हिमनद विशेषज्ञ) डॉ. डीपी डोभाल की रिसर्च के मुताबिक प्रदेश में कुल 968 ग्लेशियर हैं और सभी लगातार धीरे-धीरे पीछे को खिसक रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह कि केदारनाथ त्रासदी के मुख्य कारण बने चौराबाड़ी ग्लेशियर समेत डुकरानी और दूनागिरी जैसे प्रमुख ग्लेशियर अपेक्षाकृत ज्यादा रफ्तार के साथ पीछे खिसक रहे हैं। इनकी गहनता के साथ ही पिघलने की भी लगातार मॉनीट¨रग हो रही है।

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डॉ. डोभाल के मुताबिक सबसे ज्यादा आवाजाही वाले गंगोत्री ग्लेशियर के पीछे खिसकने की रफ्तार 20 मीटर प्रतिवर्ष है। जो बहुत ही चिंता की बात है। उनका कहना है कि इसके बाद सबसे ज्यादा तेजी से डुकरानी ग्लेशियर 18 मीटर की दर से पीछे खिसक रहा है। चौराबाड़ी में यह दर 09 तो दूनागिरी ग्लेशियर में 13 मीटर प्रतिवर्ष है।

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मोटाई भी हो रही कम

डॉ. डोभाल का कहना है कि ग्लेशियर न सिर्फ तेजी से पीछे खिसक रहे हैं, बल्कि उनकी सतह की मोटाई भी लगातार कम होती जा रही है। वाडिया संस्थान की रिसर्च के मुताबिक उत्तराखंड के ग्लेशियर्स की सतह 32 से 80 सेंटीमीटर प्रतिवर्ष की दर से कम भी हो रही है। पर्यावरणविदों का कहना है कि संतुलन बनाये रखने के लिये ये जरूरी है कि सभी पर्यावरण संरक्षण के बारे में सोचें और प्रदूषण को नियंत्रित करने में ज्यादा से ज्यादा योगदान दें।

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इस तरह घट रही सतह (प्रतिवर्ष औसत सेमी में)

गंगोत्री-80

डुकरानी-75

चौराबाड़ी-40

दूनागिरी-33

 

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