इस देश में कौओं को दी गई नौकरी, मिलेगी सैलरी

नई दिल्ली: अक्सर आपने देखा होगा सड़क पर हमेशा कूड़ा-करकट फेक दिया जाता है। आजकल दुनियाभर में सिगरेट पीने वालों की तदाद बहुत तेजी के साथ बढ़ रही है। जिससे हमारे नजर को बहुत नुक्सान हो रहा हैं। हम सिगरेट के धुंए और बची हुई सिगरेट का री-साइकिल पूरी तरह से नहीं कर सकते हैं। लेकिन ये भी सोचने वाली बात है कि सड़क पर पड़ी सिगरेट और छोटे-छोटे कूड़े के टुकड़ों को कौन साफ़ करेगा।

लेकिन इन सारे सवालों का जवाब फर्स्ट क्लास की किताबो की कहानी कौआ किस तरह पानी पीने के लिए मटके में कंकड़ डाल-डालकर पानी को उपर लाकर अपनी प्यास बुझा लेता है। इससे वैज्ञानिको को ये पता चला है कि कौआ बुद्धिमान होता है। इससे पता चलता है वह वस्तुओं का रंग और आकर देख कर उसे पहचान सकता हैं।ये सब देखने और सोचने के बाद नीदरलैंड्स की कंपनी ‘क्राउडेड सिटीज’ एक प्रोजेक्ट लेकर आई है।

दुनिया भर में 4.5 ट्रिलियन सिगरेट के टुकड़े इधर-उधर फेंक दिए जाते हैं। इन टुकड़ों को उठाने का काम करेंगे कौए। दरअसल, नीदरलैंड्स में सड़कों के आसपास क्रोबार नाम से ऐसी मशीन लगाई जाएगी, जिसमें कौओं को सिगरेट के टुकड़े इसमें उठाकर डालने की ट्रेनिंग दी जाएगी। जब भी कौए क्रोबार में सिगरेट को डालेंगे, क्रोबार उसे कुछ खाने के टुकड़े देगा। हालांकि, खाने का सामान देने से पहले मशीन ये भी चेक करेगी कि कौए ने सिगरेट का टुकड़ा ही डाला है या नहीं।

इस स्टार्टअप के मालिक रुबेन वनडेर व्लुतेन और बॉब स्पाइकमैन एक बार एक जोशुआ क्लीन नाम के आदमी से मिले। जोशुआ कौओं को सिक्के बटोरने की ट्रेनिंग देते थे। बस यहीं से इन दोनों को ख्याल आया अपने स्टार्टअप के लिए। वह अब सिगरेट उठाने के लिए कौओं को ट्रेनिंग देने के बारे में सोचा है। फिलहाल स्टार्टअप के लिए क्रोबार तैयार कर लिया गया है। आपको बता दें अब रिसर्च के नतीजे भी अच्छे आ रहे हैं और आगे उम्मीद की जा रही है कि प्रोजेक्ट कामयाब हो गया, तो दुनिया भर में क्रोबार मशीनें बनाकर बेची जाएंगी।

अगर ये आइडिया काम कर जाता है, तो भारत में ये मशीनें ‘स्वच्छ भारत अभियान’ का एक अहम हिस्सा बन जाएंगी। कौए अब मेहनत करने के बाद जो सैलरी मिलेगी। उसी से अब अपना पेट भरेंगे। यानी की अब कौए भी करेंगे नौकरी।

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