कांग्रेस जिस AFSPA को ख़त्म करना चाहती है जानिए क्या है उसमे कानून

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने जारी किए अपने घोषणा पत्र में दावा किया है कि अगर केंद्र में कांग्रेस की सरकार आती है, तो आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA ) में संशोधन करेंगे। अफस्पा एक विवादित कानून है, जो नगालैंड, असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लागू है।

मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने साल 2000 से अफस्पा के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था। वह अफस्पा कानून के खिलाफ चेहरा बन गई थीं। साल 2016 में अफस्पा हटने के बाद 16 साल बाद अपना अनशन खत्म किया था। जानते हैं कि अफस्पा कानून क्या है और इसे लेकर इतना विवाद क्यों रहा है…

1958 में भारतीय संसद ने ‘अफस्पा’ यानी आर्म्ड फोर्स स्पेशल पावर एक्ट लागू किया था। इसे अशांति वाले इलाकों में लागू करते हैं। इस कानून को खासतौर पर पूर्वोत्तर राज्यों के लिए बनाया गया था। 1958 में इसे असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड सहित पूरे पूर्वोत्तर भारत में लागू किया गया। साल 1990 से जम्मू-कश्मीर में भी हालात पर काबू करने के लिए अफस्पा लागू कर दिया गया था।

विरोध और तर्क में यह है बात

इन जगहों के लोगों का तर्क है कि सेना और अर्धसैनिक बलों के जवान जबरन और बिना किसी कारण के लोगों पर इस कानून की आड़ में बल प्रयोग करते हैं। लोगों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग कर सेना भेदभाव और दमन करती है। वहीं, इसके पक्ष में कहा जाता है कि केवल यह अधिनियम जीवन को अधिक हानि पहुंचाए बिना आतंकवाद को रोकने में कारगर है। सेना के जवानों को आतंकवाद रोधी कार्रवाई में उनकी मदद करने के लिए उनके पास अफस्पा नामक का यह एक कवच है। इस अधिनियम के द्वारा आंतकवाद से होने वाली हानियों को रोका जा सकता है।

AFSPA कब लगाया जा सकता है

विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषा, क्षेत्रीय समूहों, जातियों, समुदायों के बीच मतभेद या विवादों के कारण राज्य या केंद्र सरकार एक क्षेत्र को अशांत घोषित करती हैं। अधिनियम की धारा (3) के तहत राज्य सरकार की राय का होना जरुरी है कि क्या कोई क्षेत्र अशांत है या नहीं। अगर ऐसा नही है, तो राज्यपाल या केंद्र द्वारा इसे खारिज किया जा सकता है।

अफस्पा अधिनियम की धारा (3) के तहत राज्य या संघीय राज्य के राज्यपाल को बजट की आधिकारिक सूचना जारी करने के लिए अधिकार देता है, जिसके बाद उसे केंद्र के नागरिकों की सहायता करने के लिए सशस्त्र बलों को भेजने का अधिकार प्राप्त हो जाता है। (विशेष न्यायालय) अधिनियम 1976 के अनुसार, एक बार अशांत क्षेत्र घोषित होने के बाद कम से कम 3 महीने तक वहां पर स्पेशल फोर्स की तैनाती रहती है।

AFSPA के तहत सेना को ये अधिकार मिलते हैं

संदिग्ध व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है।

बिना वारंट किसी भी घर की तलाशी सुरक्षा अधिकारी ले सकते हैं।

किसी के भी खिलाफ जरूरत के मुताबिक सैन्य बल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

वाहन रोक कर तलाशी लने का अधिकार सुरक्षाकर्मियों को मिलता है।

अफस्पा एक्ट के चलते सैनिक पर कार्रवाई से बचाव मिलता है।

किसी मकान या ढांचे को तबाह किया जा सकता है, जहां से हथियार बंद हमले की आशंका हो।

Related Articles