संघर्ष से भरा रहा रुथ बेडर गिंसबर्ग का जीवन

रूथ बेडर गिंसबर्ग
रूथ बेडर गिंसबर्ग

वॉशिंगटन:जस्टिस रूथ बेडर गिंसबर्ग का जन्म 15 मार्च 1933 को ब्रुकलिन के न्यूयार्क शहर में हुआ था. जब गिंसबर्ग 14 महीने की थी तब उन्होंने अपनी बड़ी बहन को खो दिया. लेकिन उनकी ज़िन्दगी का सबसे बुरा दौर तब आया जब वो अपनी हाईस्कूल की पढाई कर रही थी, इसी साल उन्होंने अपनी माँ को खो दिया. माँ की अचानक हुई इस मौत ने रुथ बेडर को काफी बुरी तरह झकझोर दिया. इसके बाद उनकी ज़िन्दगी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही. संघर्ष से भरी ज़िन्दगी में रुथ बेडर ने रोजगार के लिए काफी मुश्किलों का सामना किया. फिर भी गिन्सबर्ग ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत जारी रखी.

रूथ बेडर गिंसबर्ग
रूथ बेडर गिंसबर्ग

रुथ बेडर 1961 से 1963 तक एक शोध सहयोगी और अंतर्राष्ट्रीय प्रक्रिया पर कोलंबिया लॉ स्कूल प्रोजेक्ट की एक सहयोगी निदेशक रही. उन्होंने स्वीडन के लुंस विशवविद्यालय में अपनी किताब के लिए शोध किया. स्वीडन में सिविल प्रक्रिया पर एंडर्स ब्रुज़ेलियस के साथ एक पुस्तक के सह-लेखक के लिए उन्होंने स्वीडिश भाषा भी सीखी. लैंगिक समानता पर उन्होंने जमकर काम किया. 14 मार्च 1933 को तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने रूथ बेडर गिंसबर्ग को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के सहायक जज के तौर पर नामांकित किया. अपने कार्यकाल के दौरान रुथ ने सबसे ज्यादा काम लिंग भेदभाव को दूर करने में किया.

क्लर्कसिप पद के लिए ठुकराया गया आवेदन

ये बहुत कम लोग जानते है कि रूथ बेडर जिस अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की जज रही, उसी सुप्रीम कोर्ट में उनके क्लर्कसिप पद के लिए किये गए आवेदन को ठुकरा दिया गया था. तत्कालीन सुप्रीम कोर्ट जस्टिस फेलिक्स फ्रैंकफ्टर ने उनके लिंग के कारण उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया था.

लिंग भेदभाव के खिलाफ

लिंग भेदभाव को ख़त्म करने और समाज को जागरूक करने के लिए साल 1972 में उन्होंने अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) में महिला अधिकार परियोजना की सह स्थापना करते हुए साल 1973 में इस मुहीम की वकील बन गयी. इस दौरान उन्होंने महिला अधिकार और अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन परियोजनाओं में लगभग 300 से भी अधिक लिंग भेदभाव के मामले का हिस्सा बनी.

 

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