‘अगला युद्ध स्वदेशी हथियार व उपकरणों से लड़ा और जीता जाएगा.’ –  “बोले  सेना प्रमुख बिपिन रावत “

नई दिल्ली : आर्मी चीफ़ ने कहा कि डिफ़ेंस रिसर्च एंड डेवेलपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन (डीआरडीओ) ने घरेलू समाधानों की मदद से देश की रक्षा सेवाओं की ज़रूरतों की दिशा मे तेज़ी से प्रगति की है.उन्होंने ये बातें डीआरडीओ के निदेशकों की 41वीं कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए कहीं. डीआरडीओ भारत सरकार की एजेंसी है जो सेनाओं के लिए रिसर्च और डेवेलपमेंट का काम करती है.

डीआरडीओ के पास 52 प्रयोगशालाएं हैं जहां पर एरोनॉटिक्स, नेवल सिस्टम, मिसाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, युद्धसामग्री और लैंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों पर शोध और विकास कार्य किए जाते हैं.

सेना प्रमुख का बयान

देश का रक्षा उद्योग उभर रहा है और समय आ गया है कि भविष्य के संघर्षों में इस्तेमाल वाले वाले सिस्टम विकसित किए जाएं और ‘नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफ़ेयर’ की तैयारी की जाए.

कोरोना काल  में  पूरे देश में आत्मनिर्भरता की बात जोरो-शोरों से चल रही है. इस दिशा में कई तरह के प्रोजेक्ट्स का भी उद्घाटन हो चुका है. मशीनरी और अन्य मामलों में आत्मनिर्भर बनने की राह में भारत आत्मनिर्भर बनने की तैयारी में . स्वदेशी हथियारों का भी उत्पादन कर सकता है.

एक वेबिनार में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने कहा, हमारे पास उच्च-क्षमता वाले स्वदेशी हथियार प्रणालियों का उत्पादन करने की क्षमता और इच्छाशक्ति है. ये वक्त सही दिशा में काम करने और अत्निर्भर भारत के दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के साथ, आत्म-दक्षता हासिल करने का है. बिपिन रावत ने कहा, ये वक्त भारत के पास अच्छा मौका है रक्षा उपकरणों के शुद्ध निर्यातक बढ़ने का .

अभी तक डीआरडीओ या भारत की डिफ़ेंस से जुड़ीं पीएसयू जैसे कि शिपयार्ड, एचएएल और ऑर्डिनेंस फ़ैक्टरियां बहुत ख़ास उत्पादन क्षमता हासिल नहीं कर पाई हैं.

अगले युद्ध की बात की जा रही हो तो उसमें समय महत्वपूर्ण हो जाता है. जैसे मान लीजिए अगला युद्ध (जिसकी बात सेना प्रमुख ने की) अगले साल हो तो उसे स्वदेशी हथियार प्रणालियों और उपकरणों से जीतना बहुत मुश्किल है क्योंकि डीआरडीओ की लिस्ट से ऐसा कुछ सप्लाई नहीं हुआ है.

हालांकि, यह बात सही है कि डीआरडीओ ने कुछ ऐसे क्षेत्रों में अच्छी सफलता हासिल की है, जैसे कि मिसाइल कार्यक्रम. मगर इसकी निष्पक्ष समीक्षा करनी होगी कि तीनों सेनाओं के लिए वह कैसी हथियार सामग्री तैयार करते हैं और जो परियोजनाएं अभी प्रगति में हैं, उन्हें कैसे पूरा करते हैं.

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