हाथों से शादी की मेंहदी का रंग भी नहीं छुटा था की इस बेटी का सुहाग सबसे दूर हो गया

भगदड़ में घर का इकलौता चिराग भी बुझ गया

अभी तो मेरी हाथों से शादी की मेंहदी का रंग भी नहीं छूटा था और माता रानी ने मेरा सुहाग ही छिन लिया. आखिर मैंने ऐसा क्या पाप किया है? वैष्णो माता ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मेरी गलती क्या है? यह सवाल कोई और नहीं बल्कि जम्मू के वैष्णो देवी में 31 दिसंबर की रात हुई भगदड़ में गोरखपुर के डॉक्टर अरुण प्रताप सिंह की मौत के बाद उनकी पत्नी अर्चना सिंह अपनी सास तारा देवी से कर रही हैं. वे बार- बार अपनी सास से फोन पर रो- रोकर सवाल करती रहीं…अम्मा…मेरा कसूर क्या है. माता रानी ने मुझसे मेरे पति को क्यों छिन लिया…क्या उनके दर्शन करने जाना ही हमारी गलती थी?

इकलौता चिराग भी बुझ गया

दरअसल, 31 दिसंबर की रात हुई भगदड़ में गोरखपुर का इकलौता चिराग भी बुझ गया. चौरीचौरा के रामपुर बुजुर्ग गांव के रहने वाले पूर्व प्रधान सत्यप्रकाश सिंह के इकलौते बेटे डॉ. अरुण प्रताप सिंह की भी हादसे में दर्दनाक मौत हो गई. रूद्र शादी के बाद पहली बार अपनी पत्नी अर्चना सिंह को लेकर वैष्णो देवी दर्शन के लिए गए थे. बीते 1 दिसंबर को उनकी शादी कुशीनगर जिले के पकड़ी गांव की रहने वाली अर्चना सिंह से हुई थी और 1 जनवरी की सुबह वैष्णो देवी में हुए दर्दनाक हादसे में उनकी मौत की खबर आई.

हिंद हॉस्टिपटल चलाते थे डॉ. अरुण

डॉ. अरुण यहां शहर में शाहपुर इलाके के जेल बाइपास रोड पर हिंद हॉस्टिपटल चलाते थे. वे अपनी पत्नी के साथ शहर में ही रहते थे, जबकि माता तारा देवी और पिता सत्यप्रकाश सिंह गांव में रहते थे. परिवार में अरुण के अलावा उनकी एक छोटी बहन भी हैं

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