विरोध से बैकफुट पर आई कानपुर पुलिस ने हटाई बलवाइयों की फ़ोटो लगी होर्डिंग

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कानपुर। आखिरकार तमाम विरोध के बाद पुलिस अधिकारियों को लगवाई गई होर्डिंग हटवानी ही पड़ गईं। हिन्दू और मुस्लिम समुदाय दोनों ने ही इसे गलत करार दिया था। वहीँ भाजपा ने तो सड़क में उतरकर प्रदर्शन भी किया था। माहौल ख़राब करने वालों की फ़ोटो लगाये जाने से फिर माहौल खराब होने की भी बात कही गई। जिससे पुलिस को बैकफुट पर आना पड़ा।

गौरतलब हो कि शहर में एक सम्प्रदाय के कुछ लोगों द्वारा दूसरे सम्प्रदाय के पोस्टर फाड़ने को लेकर शहर में बवाल हो गया था। बवाल में दो इंस्पेक्टर भी बलवाइयों की गोली से घायल हो गए थे। बवाल में शामिल 30 संदिग्धों की फोटोयुक्त होर्डिंग पुलिस ने कई स्थानों पर लगवा दी थी। जिसमें लिखा गया था कि इनकी सूचना देने वाले को इनाम दिया जायेगा। साथ ही उसकी पहचान भी गुप्त रखी जायेगी। होर्डिंग में कुछ पुलिस अधिकारियों के मोबाइल नंबर भी सूचना देने के लिए लिखे गए थे।
होर्डिंग लगने पर जहाँ मुस्लिम सम्प्रदाय के अगुवा शहर काजी ने इसे गलत ठहराया था वहीँ भारतीय जनता पार्टी ने भी प्रदर्शन किया था। पुलिस पर आरोप था कि वह शहर का माहौल खराब कर रही है। उलटी चाल पड़ते देख आखिर पुलिस ने इन होर्डिंग को हटवा दिया है।

माहौल खराब करने की कोशिश -एसएसपी
इस सम्बन्ध में एसएसपी शलभ माथुर का कहना है कि शहर के प्रमुख स्थानों पर आरोपियों की फ़ोटो लगाई गई थीं। लेकिन कुछ लोग इसका फायदा उठाकर शहर का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी कोशिश नाकाम करने को फिलहाल इन्हें उतारने का फैसला लिया गया है।

वकीलों ने भी विवाद को जन्म देने की बात कही

शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता एसपी सिंह व शिवाकांत अवस्थी का कहना है कि विवेचना के स्तर पर पुलिस वांटेड के पोस्टर चस्पा करा सकती है। उसे वांटेड व गुमशुदा के लिए पोस्टर लगाने का अधिकार प्राप्त है। लेकिन होर्डिंग मामला अलग है। होर्डिंग में जो फ़ोटो लगी हैं उन पर पुलिस को केवल शक है। इसलिए बिना पोस्टर लगाये जांच कर दोषियों की गिरफ्तारी करनी चाहिए। पोस्टर लगाकर अनावश्यक विवाद को जन्म दिया।

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