बलात्कारी सरकार ने महिला पत्रकारों को किया प्रताड़ित, हाथरस को बनाया कश्मीर 

लखनऊ : अभी तक हाथरस की बिटिया की आग ठंडी भी नहीं हुई थी और यूपी पुलिस की गुंडई चरम पर है। पहले यूपी पुलिस ने ज़ोर ज़बरदस्ती से हाथरस की बिटिया के बेजान शरीर को उसके परिवार वालों की इजाज़त के बिना ही आग की लपटों के हवाले कर दिया और अब महिलाओं के साथ बदसुलूकी पर उतर आई है। प्रदेश की पुलिस का दिमाग इतना ख़राब हो गया है कि महिला पत्रकारों के साथ धक्का मुक्की की जा रही है, उन्हें पत्रिकारिता करने से रोका जा रहा है, पीड़ित परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा है, सलाखों के पीछे डालने की कोशिश की जा रही है।

योगी आदित्यनाथ
योगी आदित्यनाथ

जहाँ पत्रकार पीड़ित परिवार को सांत्वना देना चाहता है, उसे अपनी आवाज़ उठाने का मौका देना चाहते हैं लेकिन ये वर्दी वाले भक्षक गुंडागर्दी पर इस तरह आमादा हैं कि कैमरावालों की गिरेबान पर हाथ डाला गया और महिला पत्रकार का कुरता फाड़ने की कोशिश की गई। शर्म आती है! ये सब देखकर कि जिन आरोपियों को फांसी के फंदे पर होना चाहिए उन्हें बचाने के लिए यूपी पुलिस महिलाओं के साथ अभद्रता पर उतर आई है। समझ नहीं आता कि किसे और क्यों बचाने की कोशिश की जा रही है ? इसका जवाब न किसी राजनेता के पास है और पुलिस के किसी आलाधिकारी के पास है। सभी मूक बनकर बैठे हुए हैं।

योगी सरकार पूरी तरह से सोइ हुई है। क्या अब सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपनी आँखों पर पट्टी बांध ली है या फिर आज गाँधी जयंती पर गाँधी जी के बन्दर बन चले हैं। देखो ही नहीं, सुनो ही नहीं और बोलो ही नहीं। योगी सरकार ने अपनी हरकतों से गाँधी जी के तीन नए बंदरों को लॉन्च किया है। वो सरकार, वो पुलिस जो बलात्कारियों को सजा दिलाने में निर्बल है लेकिन महिलाओं पर ज़ुल्म ढाने के लिए पूरी तरह प्रबल है। वाह रे योगी सरकार!

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