चंद्रग्रहण को लेकर हुआ ख़ुलासा, दस साल के रिकॉर्ड में सातवीं बार होगा कुछ ऐसा

शुक्रवार को चंद्र ग्रहण नहीं है। यह चंद्रमा की उपच्छाया है। इस कारण चंद्रमा पर धूल ही नजर आएगी। वह पूरी तरह से काला नहीं होगा। प्रत्येक चंद्र ग्रहण के घटित होने से पूर्व चंद्रमा पृथ्वी की उपच्छाया में अवश्य प्रवेश करता है। इसे अंग्रेजी में ‘पेनंबरा’ कहते है। उसके बाद ही वह पृथ्वी की वास्तविक छाया भूभा (अंब्रा) में प्रवेश करता है। उसे वास्तविक ग्रहण कहा जाता है। भूभा में चंद्रमा के संक्रमण काल को चंद्रग्रहण कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुक्रवार रात दस बजे से चंद्रमा पर धूल सी दिखाई देगी। राहु का भी चंद्रमा पर कोई प्रभाव नहीं होगा।

इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स के अनुसार, कई बार पूर्णिमा को चंद्रमा उपच्छाया में प्रवेश कर उपच्छाया शंकु से बाहर निकल जाता है। इस उपच्छाया के समय चंद्रमा का बिम्ब धुंधला पड़ता है। काला नहीं होता। धर्मशास्त्रकारों ने इसे ग्रहण की कोटि में नहीं रखा। संवत 2076 में चंद्रमा ठीक इसी प्रकार 10 और 11 जनवरी की रात में चंद्रमा उपच्छाया में प्रवेश कर उपच्छाया शंकु से ही बाहर निकल जायेगा।

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