अंतरिक्ष में जाने वालों के दिल का आकार हो जाता है छोटा

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नई दिल्ली। अंतरिक्ष में जाना हर किसी का सपना होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं वहां और यहां के वातावरण में जो अंतर है उससे एक मनुष्य के शरीर में कैसा असर पड़ता है। अंतरिक्ष में जाने वाले लोगों के शरीर पर वहां के वातावरण का बेहद बुरा असर पड़ता है। आइये आज हम आपको बताते हैं अंतरिक्ष में मनुष्य़ों के शरीर में होने वाले कुछ बदलावों के बारे में। आपको बता दें, अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय राकेश शर्मा थे। 1984 में वो आठ दिन के लिए अंतरिक्ष में रहे थे।

  • अंतरिक्ष में जाने वाले मनुष्यों को अपनी सेहत का बहुत ध्यान रखना पड़ता है। वहां जाने पर शरीर की हड्डियां और मांसपेशियां लगातार कमजोर होती जाती हैं। मांसपेशियों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए वहां अंतरिक्षयात्रियों को एक निश्चित अंतराल के बाद अभ्यास करना पड़ता है, जिसकी ट्रेनिंग उन्हें वहां जाने से पहले दी जाती है।
  • इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से वापस आने वाले वाले कुछ अंतरिक्षयात्रियों का कहना है कि धरती पर वापस आने के बाद उनके हाथ के नाखून गायब थे। इसके पीछे का कारण उनके हाथों के ग्लब्स का अनोखा डिजाइन बताया गया।
  • अंतरिक्ष में पृथ्वी की अपेक्षा अधिक रेडिएशन का सामना तकरना होता है जिस कारण से वहां जाने वालों के स्वास्थ्य पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
  • जिन लोगों की लंबाई कम है उनके लिए एक अच्छी खबर है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि अंतरिक्ष में जाने वाले लोगों की लंबाई कुछ इंच बड़ जाती है। ऐसा अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण बल की मौजूदगी ना होने के कारण होता है।
  • लंबे समय तक अंतरिक्ष में समय बिताने वालों की आंखों की रौशनी कम हो जाती है। इस नेत्रदोष को विजुअल इम्पेयरमेंट प्रेशर सिंड्रोम (VIIP) के नाम से जाना जाता है। इसके पीछे के कारण का अभी पता नहीं चल सका है।
  • अंतरिक्ष में जाने वालों के दिल का आकार सिकुड़कर थोड़ा छोटा हो जाता है। इसके अलावा सामान्य की अपेक्षा कम मात्रा में रक्त पंप करने लगता है।
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