पाकिस्तानी पायलट द्वारा राफेल उड़ाने की खबर पर फ्रांस के एंबेसेडर का आया बयान….

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नई दिल्ली: राफेल विमान का निर्माण करने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन के भारत में स्थित एक्जीक्यूटिव्स ने कहा है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि पाकिस्तानी पायलट्स को फ्रांस में राफेल उड़ाने की ट्रेनिंग दी गई थी। इस मामले में फ्रांस के एंबेसेडर एलेक्जेंडर जिंगलर ने पाकिस्तानी पायलटों द्वारा राफेल जेट से ट्रेनिंग लेने वाली मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए इन्हें फेक न्यूज बताया है।

बता दें इस मामले में स्पष्टीकरण देने की रिक्वेस्ट डसॉल्ट कॉर्पोरेट के हेडक्वार्टर में भी भेजा गई थी। दरअसल, एविएशन इंडस्ट्री पर फोकस करने वाली स्वतंत्र न्यूज वेबसाइट www.ainonline.com में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था नवंबर 2017 में कतर के लिए राफेल फाइटर जेट में प्रशिक्षण पाने वाले पायलटों में पाकिस्तानी एक्सचेंज ऑफिसर भी शामिल थे।

इस खबर से पता चलता है कि डसॉल्ट की ओर से भारत को राफेल विमान की आपूर्ति किए जाने से पहले ही पाकिस्तानी पायलट राफेल जेट उड़ाने लगे थे। कतर ने 6 फरवरी को डसॉल्ट की मेरिग्नैक फैसिलिटी में अपने पहले राफेल की डिलीवरी ली थी। एक प्रेस बयान में डसॉल्ट ने कहा कि कतर ने मई 2015 में 24 राफेल फाइटर्स के लिए डील की थी। दिसंबर 2017 में उसने 12 अतिरिक्त अतिरिक्त लड़ाकू विमानों का आदेश दिया। पहले 24 लड़ाकू विमानों के लिए 6.3 अरब यूरो में सौदा हुआ था।

पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को कई मध्य पूर्वी देशों के सशस्त्र बलों के साथ काम करने के लिए दशकों से तैनात किया गया है। पाकिस्तान को जॉर्डन सहित साझेदार देशों से सैन्य हार्डवेयर भी मिल चुके हैं। इसमें 13 अतिरिक्त एफ-16 ए/बी फाइटर्स शामिल हैं, जिनकी इस्लामाबाद को आपूर्ति की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि भारत के सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने की नाकाम कोशिश में पाकिस्तान ने इनमें से कुछ का उपयोग किया हो सकता है।

जनवरी 2018 में पाकिस्तानी समाचार पोर्टल www.thenews.com.pk ने रिपोर्ट दी थी कि इस्लामाबाद में पाकिस्तान वायु सेना मुख्यालय में कतर की वायु सेना के कमांडर ने दौरा किया था। पाकिस्तान के वायु सेना प्रमुख ने कथिततौर पर अपने समकक्ष को विमानन और सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में समर्थन और सहयोग की पेशकश की थी।

राफेल के प्लेटफॉर्म के बारे में पाकिस्तानी पायलटों की जानकारी भारतीय वायु सेना के लिए परेशानी का सबक हो सकती है। बताते चलें कि इस साल सितंबर में भारत को अपना पहला राफेल फाइटर जेट मिलने वाला है। हालांकि, भारतीय वायु सेना ने इस जेट में भारत की जरूरत के हिसाब से 14 विशिष्ट अपग्रेडेशन किए हैं। मगर, विमान में थेल्स का बना RBE-2 AESA (एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे) रडार लगाया गया है। कतर को मिले राफेल विमानों में भी यही राडार लगा है।

RBE-2 की मदद से पायलट जमीन, समुद्र और हवा में कई प्रतिकूल परिस्थितियों को सही ढंग से ट्रैक कर सकते हैं और टारगेट कर सकते हैं। RBE-2 पर प्रशिक्षित होने के बाद पाकिस्तानी पायलटों को इस विमान की सटीक रेंज का पता चल जाएगा, जिसे भारतीय वायु सेना के पायलट राफेल के मिलने के बाद उपयोग करेंगे।

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