केस बंटवारे को लेकर कोर्ट का बड़ा फैसला, कहा- चीफ जस्टिस के अधिकार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता

नई दिल्ली। केस बंटवारे को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि चीफ जस्टिस के अधिकार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च संवैधानिक अधिकारी हैं, ऐसे में उन पर अविश्वास नहीं जताया जा सकता है। केस आवंटन उनका विशेषाधिकार है।

वकील अशोक पांडे ने दाखिल की थी जनहित याचिका
सुप्रीम कोर्ट में केस बंटवारे को लेकर नए नियम बनाने को लेकर वकील अशोक पांडे ने जनहित याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में कहा गया है कि चार सबसे वरिष्ठ जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्य न्यायधीश के बेंच बनाने और अधिकार क्षेत्र के निपटारे के संबंध में नियम निर्धारित करना राष्ट्रीय हित में है।

बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट के 4 वरिष्ठ जज जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस रंजन गोगोई ने मीडिया के सामने चीफ जस्टिस पर प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।

केस बंटवारे को लेकर दाखिल याचिका को खारिज करते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश ए.एम.खानविलकर और न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि सीजेआई इस संस्था के प्रमुख हैं और न्यायिक एवं प्रशासनिक दोनों मामलों में शीर्ष अदालत के सुचारू ढंग से कामकाज करने के लिए उनके पास प्रशासनिक शक्तियां निहित हैं।

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