नेपाल में बनेगी महाभारत के रचियता वेदव्यास की सबसे ऊँची मूर्ति

नई दिल्‍ली: महाभारत के रचियता महर्षि वेदव्यास जी की नेपाल के तान्हु जिले के व्यास नगर निगम में 108 फुट ऊंची प्रतिमा बनाने की योजना तैयार की गई है.माना जाता है की महर्षि वेद व्यास का जन्म नेपाल के तान्हू जिले में हुआ था. इन्होने हिन्दुओं के पवित्र धर्मग्रंथ वेदों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया. यहाँ पर यह भी मान्यता है कि इसी क्षेत्र के व्यास गुफा में महर्षि जी ने महाभारत की रचना की थी.व्यास जी की जो प्रतिमा प्रस्तावित हुई है उसका निर्माण जिले के शिव पंच्यान मंदिर में किया जाएगा. इसका उद्देश्य भारत और नेपाल से धार्मिक पर्यटकों को आकर्षित करना है.

व्यास नगर निगम की उप महपौर मीरा शर्मा ने बताया कि प्रतिमा के निर्माण के लिए 63 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है.

महर्षि वेदव्यास का जन्म त्रेता युग के अन्त में हुआ था और वह पूरे द्वापर युग तक जीवित रहे थे.

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास त्रिकालज्ञ थे और उन्होंने दिव्य दृष्टि प्राप्‍त की थी. महर्षि व्यास ने वेद का चार भागों में विभाजन कर दिया ताकि मंद बुद्धि और कम स्मरणशक्ति रखने वाले भी वेदों का अध्ययन कर सकें. महर्षि वेदव्‍यास ने उन ग्रंथों का नाम रखा- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद. वेदों का विभाजन करने के कारण ही व्यास वेदव्यास के नाम से प्रसिद्ध हुए. वेद में निहित ज्ञान के अत्यन्त गूढ़ तथा शुष्क होने के कारण वेद व्यास ने पांचवे वेद के रूप में पुराणों की रचना की जिनमें वेद के ज्ञान को रोचक कथाओं के रूप में बताया गया है. पुराणों को उन्होंने अपने शिष्य रोम हर्षण को पढ़ाया. व्यास के शिष्यों ने अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार उन वेदों की अनेक शाखाएं और उप शाखाएं बना दीं. व्यास ने महाभारत की भी रचना की.

महर्षि वेदव्‍यास का जन्‍म आषाढ़ शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा को हुआ था. उनके जन्‍मदिवस को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता  है. गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा का विधान है. दरअसल, गुरु की पूजा इसलिए भी जरूरी है क्‍योंकि उसकी कृपा से व्‍यक्ति कुछ भी हासिल कर सकता है. गुरु की महिमा अपरंपार है. गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्‍ति नहीं हो सकती. गुरु को तो भगवान से भी ऊपर दर्जा दिया गया है

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