आईआईटी कानपुर की तकनीक पहुंचेगी चांद पर, जानें-क्यों और कितना अहम है ISRO का ये मिशन

जब आप यह खबर पढ़ेंगे तो तब तक चांद की सतह के लिए भारत का चंद्रयान-2 रवाना हो चुका होगा। देश के लिए गौरवान्वित करने वाले इस खास मिशन में कानपुर आईआईटी के वैज्ञानिकों की भूमिका काफी अहम है क्योंकि यहीं के वैज्ञानिकों ने इस मिशन के लिए सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर तैयार किया है।

यह सॉफ्टवेयर मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. आशीष दत्ता व इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. केएस वेंकटेश ने बनाया है।  इसे मोशन प्लानिंग और मैपिंग जेनरेशन सॉफ्टवेयर नाम दिया गया है। यह वह सॉफ्टवेयर है जो चंद्रयान-2 के छह पहिए वाले रोवर ‘प्रज्ञान’ को चांद की सतह पर रास्ता दिखाएगा जिसके जरिए प्रज्ञान चांद पर पानी व खनिज की तलाश करेगा। वहां की स्थिति का फोटो खींचकर इसरो को भेजेगा।

रोवर को हर बाधाओं से करेगा आगाह
आईआईटी वैज्ञानिकों का यह सॉफ्टवेयर रोवर का मूवमेंट तो तय करेगा ही साथ में उसका रूट भी निर्धारित करेगा, जिससे ऊर्जा खपत सबसे कम हो। रोवर को टारगेट तक पहुंचाने के लिए उसे बीच में पड़ने वाले सभी बाधाओं से भी आगाह करेगा। इसका संचालन 20 वॉट की सौर व बैटरी की ऊर्जा से होगा। यह सॉफ्टवेयर प्रज्ञान को चांद की सतह में खुदाई कर पानी व केमिकल तलाशने में भी मदद करेगा।

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