पहली बार होने जा रहा है माघ मेला में विश्व हिंदू परिषद का संत सम्मेलन

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प्रयागराज: सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के बाद विश्व हिंदू परिषद ने रविवार को भव्य राम मंदिर के प्रस्तावित स्वरूप को अंतिम बार माघ मेले में दर्शनार्थ स्थापित किया है। इसे सीतापुर के कलाकारों ने निशुल्क तैयार किया है। अब मंदिर के स्वरूप को आम लोग भी देख सकेंगे। साल 1989 में पहली बार माघ मेले में ही राम मंदिर का स्वरूप स्थापित किया गया था। तब राम मंदिर आंदोलन के नायक विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल इस कार्यक्रम की अगुआई कर रहे थे।

विहिप की ओर से कुंभ और अर्धकुंभ में ही संत सम्मेलन तथा धर्म संसद का आयोजन होता था।  माघ मेला के परेड मैदान में त्रिवेणी मार्ग पर स्थित विहिप के शिविर में दो दिवसीय बड़ा आयोजन होगा। 20 जनवरी को विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक होगी। 21 जनवरी को संत सम्मेलन होगा।

विहिप काशी प्रांत के संगठन मंत्री मुकेश कुमार ने बताया कि संत सम्मेलन में श्रीराम जन्म भूमि, श्रीकृष्ण जन्म भूमि, काशी विश्वनाथ समेत सभी ज्योर्तिलिंगों के पुजारियों-प्रमुखों तथा सभी शंकराचार्यों को आमंत्रण भेजा गया है। चारों धाम बद्रीनाथ, रामेश्वरम, पुरी व द्वारिका के साथ केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री के प्रमुख पुजारी बुलाए गए हैैं। तिरुपति बालाजी मंदिर, वैष्णो देवी मंदिर, महाकाल मंदिर उज्जैन, विंध्यवासिनी, शारदा माता मैहर, पूर्णागिरी मंदिर, ज्वाला देवी, गिरिजा देवी, मंसा देवी मंदिर के पुजारियों व प्रमुखों को भी बुलावा भेजा गया है। माघ मेला स्थित विहिप के शिविर में संतों के रहने आदि की व्यवस्था भी की जा रही है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में आमंत्रण भेजकर बुलाया गया है। पिछले साल कुंभ के दौरान विहिप की ओर से आयोजित संत सम्मेलन में सीएम योगी ने शिरकत की थी।

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