…तो डूब जाएगा सबसे पहले नया साल देखने वाला द्वीप

01012016-md-hr-1-77184-1-smallकिरिबती द्वीप समूह। दुनिया में सबसे पहले नया साल मनाने वाला मुल्क। लेकिन अगले तीस से साठ वर्षों में यहां हैपी न्यू इयर बोलने वाला कोई नहीं होगा क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से यह आईलैंड डूब जाएगा। भारत समेत दुनिया भर के लोगों को 2016 में यह संकल्प लेना है कि जलवायु बदलाव को रोकने की हर संभव कोशिश उन्हें करनी होगी। यह हालत प्रशांत महासागर में स्थित किरिबती की ही नहीं बल्कि भारत के सुंदरवन और बंगाल की खाड़ी से लेकर हिन्द महासागर में फैले सैकड़ों आईलैंड्स की है।

हाल की बात है। पैरिस में क्लाइमेट समिट के दौरान किरिबती द्वीप समूह के राष्ट्रपति अनोत टोंग एक महत्वपूर्ण बैठक से पहले एक चर्च में प्रार्थना के लिए चले गए। लौटकर उन्होंने बताया कि वह प्रार्थना करने गए थे कि पैरिस में चल रही कॉन्फ्रेंस में कोई समझौता जरूर हो जाए। ताकि ग्लोबल वॉर्मिंग के असर को कम किया जा सके और उनका द्वीप बच जाए।

रो पड़े थे राष्ट्रपति

मीडिया से बात करते वक्त टोंग की आंखों में आंसू थे। आईलैंड समूह के सभी देशों की यही स्थिति थी। किरिबती आईलैंड के लोग अब तक खुद को भाग्यशाली मानते थे कि वे दुनिया में सबसे पहले सूर्य के दर्शन करते हैं। वैज्ञानिकों का दावा है कि तीस से साठ बरसों के दरम्यान यह आईलैंड डूब जाएगा। हालांकि ऊंची लहरों से होने वाली तबाही पहले ही शुरू हो चुकी है।

बचानी होगी बिजली

विशेषज्ञों का कहना है कि पहली लड़ाई बिजली की बचत को लेकर हो सकती है। ज्यादातर बिजली कोयला जलाने से बनती है। कम बिजली इस्तेमाल होगी तो कम कोयला जलाने की नौबत आएगी और कम ग्रीन हाउस गैसें वातावरण में पहुंचेंगी। बेवजह कार या बाइक निकालना भी बंद करना होगा।

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