खाने से लेकर घूमने तक लखनऊ में है सब कुछ, आ जाएगा मजा

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लखनऊ। जनाब आप नवाबों के शहर लखनऊ आए और यहां के पर्यटन का लुफ्त न उठा पाएं तो मतलब आपका यहां आना बेकार हुआ। जितना फेमस लखनऊ अपने खाने-खजाने के लिए है। उतना ही फेमस लखनऊ अपने पर्यटन के लिए भी है। यहां मुग़लों द्वारा बनाई गई कई ऐसी ऐतिहासिक इमारते हैं जिनके बारे में आप जरुर जानना चाहेंगे। इसलिए अगर आप यूपी आने का प्लान बना रहे हैं और नॉन-वेज खाने का भी शौक रखते हैं तो यहां तशरीफ जरुर रखें क्योंकि लखनऊ कभी किसी को निराश नहीं करता बॉस।

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सबसे पहली बात आप यहां टाइम लेकर आयें क्योंकि लखनऊ में बहुत कुछ फेमस है। खाने के लिए आप मधुरिमा, टुंडे कबाबी, रामआसरे, चप्पन भोग, राधे लाल, किंग ऑफ चाट, 1090 चौराहा, मोती महल, प्रकाश की चाट, वाहिद बिरयानी, इदरीस की बिरयानी, श्री लस्सी कार्नर और कई तमाम जगहों पर जाकर खाने का लुफ्त उठा सकते हैं।

ये तो रही खाने की बात अब थोड़ा घूमकर और शौपिंग करके आते हैं। शौपिंग के लिए सबसे अच्छी और सस्ती जगह आपको लखनऊ के अमीनाबाद और हजरतगंज में मिलेगी। वैसे यही वो दो जगहें भी हैं जहां पुराना लखनऊ आपको अच्छे से देखने को मिल जायेगा।

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यहां कई शौपिंग मौल व मल्टीप्लैक्स भी खुल गए हैं। घूमने और खरीदारी के लिए लखनऊ में हर तरह के बाजार हैं। इन में अमीनाबाद, हजरतगंज, निशांतगंज, आलमबाग और चारबाग प्रमुख हैं। चिकनकारी के कपड़े यहां की खासीयत हैं। आनंदी वाटर पार्क, ड्रीमवर्ल्ड अंडररूफ वाटर पार्क और ड्रमीवैली में घोड़ा, ऊंट और बैलगाड़ी की सवारी के साथ देशी खाने का स्वाद लिया जा सकता है।

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लखनऊ जो भी घूमने आता है सब से पहले वह बड़ा इमामबाड़ा (भूलभुलैया) जरूर देखना चाहता है। यह लखनऊ की सब से मशहूर इमारत है। चारबाग रेलवे स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर दूर बना इमामबाड़ा वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। 1784 में इस को नवाब आसिफुद्दौला ने बनवाया था। इस इमारत का पहला अजूबा 49।4 मीटर लंबा और 16।2 मीटर चौड़ा एक हौल है।

इस में किसी तरह का कोई खंभा नहीं है। इस के एक छोर पर कागज फाड़ने जैसी हलकी आवाज को भी दूसरे छोर पर सहजता से सुना जा सकता है। इस इमारत का दूसरा अजूबा 409 गलियारे हैं। ये सब एकजैसे दिखते हैं और समान लंबाई के हैं। ये सभी एकदूसरे से जुड़े हुए हैं।

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इन में घूमने वाले रास्ता भूल जाते हैं। इसीलिए इस को भूलभुलैया भी कहा जाता है। इमामबाड़े में नहाने के लिए एक बावड़ी बनी है, जिस में गोमती नदी का पानी आता है। सुरक्षा की दृष्टि से यह कुछ ऐसी बनी है कि इस के अंदर नहा रहा आदमी बाहर वाले को तो देख सकता है, लेकिन बाहर वाला अंदर वाले को नहीं देख पाता।

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बड़े इमामबाड़े से 1 किलोमीटर आगे छोटा इमामबाड़ा है। मुगल स्थापत्यकला के इस बेजोड़ नमूने का निर्माण अवध के तीसरे नवाब मोहम्मद अली शाह द्वारा 1840 में कराया गया था। दूर से यह इमामबाड़ा तामजहल जैसा दिखता है। यहां नहाने के लिए एक खास किस्म का हौद बनाया गया था, जिस में गरम और ठंडा पानी एकसाथ आता था। इस इमारत में लगे शीशे के झाड़फानूस भी बहुत ही खूबसूरत हैं।

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इसके साथ ही आप रेजीडेंसी भी जरुर जाईये। लखनऊ चिडि़याघर भी यहां काफी फेमस है। लखनऊ चिडि़याघर का ऐंट्री टिकट 60 रुपए प्रतिव्यक्ति है। चिडि़याघर में मछलीघर और राजकीय संग्रहालय का टिकट अलग से लेना पड़ता है। लखनऊ के जनेश्वर मिश्रा पार्क की दूरी 8 किलोमीटर है। यहां पहुंचने के लिए बस का टिकट 10 रुपए और औटो का किराया 20 रुपए है। जनेश्वर मिश्रा पार्क में फ्री ऐंट्री है।

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चारबाग रेलवे स्टेशन से अंबेडकर पार्क की दूरी 6 किलोमीटर है। बस और टैंपो रूट पर होने के कारण 10 से 20 रुपए में यहां तक पहुंचा जा सकता है। अंबेडकर पार्क में प्रवेश टिकट 10 रुपए है। यहीं पास में ही लोहिया पार्क है, जिस का टिकट 5 रुपए है। चारबाग से कुकरैल पिकनिक स्पौट की दूरी 12 किलोमीटर है। बस से 15 रुपए और टैंपो से 25 रुपए में यहां पहुंचा जा सकता है। पिकनिक स्पौट में प्रवेश टिकट 10 रुपए है। यह मगरमच्छ प्रजनन केंद्र के लिए जाना जाता है।

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तो अब अगर आपका लखनऊ आने का प्लान नहीं है तो जरुर बनाइये। यहां आपको बहुत से नए किस्से मिलेंगे, कुछ नहीं कहानियां व रोचक बातें मिलेंगी। साथ ही, आप यहां से शॉपिंग किए हुए सामान के साथ कुछ खट्टी-मीठी यादें भी अपने साथ जरुर लेकर जाने वाले हैं। इसलिए अब देर मत करिए और लखनऊ जरुर घूमिए।

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