स्पेस और पृथ्वी में 50 साल पहले हुआ था मुकाबला, अब तीसरा शतरंज महामुकाबला

चेन्नै: कोरोना महामारी के बीच शतरंज ही एक ऐसा खेल है, जिसका जादू अभी कम नहीं हुआ है और न इसके खेलने वालों पर ही कोई असर पड़ा है। 64 वर्गों वाले इस खेल की सीमाएं भी अब धरती की सीमा पार कर आसमान में पहुंच गई हैं। धरती और आसमान के बीच शतरंज का एक महामुकाबला खेला जाने वाला है, जिसमें अंतरिक्ष की एक टीम भी हिस्सा लेने वाली है।

इस अनोखे खेल में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से कोस्मोनोतेस अनातोली इविनेशिन और इवान वैगनर धरती की ओर से खेलने वाले ग्रैंडमास्टर सर्गेई कारजाकिन से मुकाबला करेंगे। शतरंज का यह मुकाबला 9 जून 1970 को पहली बार पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच खेले गए शतरंज के मुकाबले की 50वीं एनिवर्सरी पर खेला जाने वाला है। इस मुकाबले में पृथ्वी की ओर से 30 साल के रूसी खिलाड़ी सर्गेई कारजाकिन शिरकत करेंगे।
सेर्गेई कर्जाकिन रैपिड और ब्लिट्ज चैंपियन रह चुके है। साथ ही शतरंज के सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर रहने का रेकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज है। इस ‘अंतरब्रह्मांडीय’ मुकाबले को लेकर उन्होंने कहा, ‘मुझे यकीन है कि यह मेरे लिए कभी न भूलने वाले मुकाबलों में से एक होगा। मैं कॉस्मोनॉट्स की प्रशंसा करता हूं क्योंकि वही असली हीरो हैं। मुझे पता है कि वह जहां से यह खेल खेलेंगे, वहां से इसे खेलना आसान नहीं होगा।’
अनातोली और वैगनर आईएसएस से यह मैच खेलेंगे जबकि कारजाकिन मॉस्को म्यूजियम ऑफ़ कॉस्मोनॉटिक्स से अपनी चाल चलेंगे। खिलाड़ी एक टैबलेट पर अपनी चाल चलेंगे। खेल का लाइव प्रसारण रूसी समय से 12 बजे से किया जाएगा। इसकी लाइव स्ट्रीमिंग रूसी और अंग्रेजी में की जाएगी। यह तीसरा मौका होगा जब अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच यह अनोखा मुकाबला खेला जाएगा। इससे पहले साल 2008 में भी ऐसा मैच खेला गया था, जिसमें पृथ्वी की जीत हुई थी।

9 जून को होने वाला यह मैच अंतरिक्ष और धरती के बीच खेले गए उस पहले मुकाबले की याद में आयोजित किया जा रहा है, जिसे अब 50 साल होने जा रहे हैं। 9 जून 1970 को पहली बार अंतरिक्ष में चेस खेला गया था। इस खेल में अंतरिक्ष की ओर से सोवियत अंतरिक्ष यान सोयुज -9 सी के पायलट-कॉस्मोनॉट एंड्रीयन ग्रिगोरीविच निकोलेव और विटाली इवानोविच सेशियानोव ने हिस्सा लिया था जबकि पृथ्वी के प्रतिनिधियों के रूप में निकोलाई पेत्रोविच कामैनिन और पायलट-कॉस्मोनॉट विक्टर गोरबाटको ने शिरकत की थी।

इस मुकाबले में आपसी संचार के लिए रेडियो की मदद ली गई थी। मैच के लिए जीरो ग्रेविटी की परिस्थितियों के लिए खासतौर पर डिजाइन किए गए शतरंज का इस्तेमाल किया गया था।

Related Articles