मैदान पर गालियां बकने वाले कोहली को एमएस धोनी से सीखनी चाहिए ये 5 बातें

भारतीय कप्तान कोहली अपने गुस्सैल स्वभाव और तेज-तर्रार तेवर के लिए पहचाने जाते हैं। विराट का यही आक्रामक अंदाज इन दिनों इंडियन टी-20 लीग में चर्चा का विषय बना हुआ है। लगता है लगातार हार के बाद निराशा के गर्त में समा चुके बैंगलोर के कप्तान अपनी टीम को मिल रही जीत रूपी ऑक्सीजन से इतने उत्साहित हो चुके हैं कि भद्दी गालियां देने से भी गुरेज नहीं कर रहे।


पंजाब के खिलाफ खेले गए मैच में कई बार विराट को कैमरे के सामने गालियां बकते देखा गया। पंजाब के कप्तान अश्विन का कैच लपकने के बाद उन्होंने जो हरकत की, उसे पूरी दुनिया ने देखा। विश्व कप से ठीक पहले विराट जिस तरह झल्ला रहे हैं, उसे देखकर कैप्टन कूल महेंद्र सिंह धोनी याद आ जाते हैं।विपरित हालातों में भी शांत चित्त रहकर रणनीति बनाना और बिना किसी शोर-शराबे अनावश्यक आक्रामकता के बगैर उसे खिलाड़ियों को समझाना वाकई एक कला है, जिसकी घुट्टी धोनी ने पी ली। धोनी की सादगी और कुशल व्यवहार ही है कि विश्व क्रिकेट में हर कोई उनका नाम बड़े अदब से लेता है। विराट को माही से खेल के अलावा यह अच्छाई ग्रहण करनी चाहिए।

खुद विराट को भी अहसास है कि वे धोनी के बिना अधूरे हैं। क्या इस अधूरेपन को भरने की पहल नहीं कर सकते? धोनी के पास लंबा अनुभव है। वे विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोते। मैच में कैसी भी स्थिति हो धोनी बड़े ही कूल अंदाज में रहते हैं। कितना भी प्रेशर हो धोनी के चेहरे पर शिकन नहीं आती है। जीत हो, हार हो या मैच ड्रॉ हो उनके चेहरे के हाव भाव में ज्यादा फर्क नहीं होता है। विराट को यह टेम्परामेंट सीखना चाहिए।

स्लेजिंग का जवाब धोनी ने कभी स्लेजिंग ने नहीं दिया बल्कि अपने बल्ले से दिया है। यह विराट के लिए बहुत अहम सबक होगा। धोनी खुद भी आक्रामक कप्तान रहे हैं लेकिन अति आक्रामकता से बचते रहे हैं। मैदान पर विराट कोहली का आपा खोने का बेहद खराब रिकॉर्ड रहा है। वे बहुत जल्दी अपना धैर्य खो देते हैं।ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब दिल्ली के इस आक्रामक बल्लेबाज ने क्रिकेट की गरिमा को नुकसान पहुंचाया हो। अपने करियर के शुरुआती दौर में तो विराट ने ऑस्ट्रेलियाई फैंस को ही अभद्र इशारा कर दिया था,

जिसके बाद इस घटना ने काफी तूल पकड़ा था।धोनी अपनी कप्तानी में कभी भी किसी भी खिलाड़ी से सलाह लेने में हिचकिचाए नहीं। सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और अनिल कुंबले जैसे सीनियर खिलाड़ी हों या धोनी से जूनियर खिलाड़ी उन्होंने जरूरत पड़ने पर हर किसी की सलाह ली। हालांकि मैदान के भीतर धोनी और विराट की जुगलबंदी जगजाहिर है। मगर मौजूदा इंडियन टी-20 लीग में ऐसा कभी नहीं हुआ जब विपरित हालातों में घिरे विराट को बैंगलोर के किसी दूसरे खिलाड़ी से सलाह लेते देखा गया हो।

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