ये हैं वो पांच कारण…जिसकी वजह से महबूबा से दूर हुए मोदी

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार अब उखड़ चुकी है। सूबे की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है। लेकिन इस समय लोगों के दिमाग में एक बड़ा सवाल है कि आखिर अजित डोभाल और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बीच ऐसी कौन सी बात हुई जो भाजपा ने जम्मू कश्मीर में हुई बैठक के बाद अपना गठबंधन ख़त्म कर लिया।

दरअसल, भाजपा ने पीडीपी से गठबंधन ख़त्म करने की पांच बड़ी वजह बताई हैं। आइये इन पाँचों वजह पर एक नजर डालते हैं।

इसकी पहले पहली वजह है सूबे में रमजान में किया गया सीजफायर का फैसला। दरअसल, सीएम महबूबा ने रमजान के महीने पर सीमा पर सीजफायर का पालन करने का आग्रह किया था, जिसे भाजपा नीत केंद्र सरकार ने तवज्जो भी दिया था।

रमजान का सीजफायर 
इसे लेकर भारत और पाकिस्तान सेना के उच्चाधिकारियों के बीच बैठक भी हुई और पाकिस्तान इसपर राजी भी हो गई लेकिन बाद में पाकिस्तान ने वादाखिलाफी करते हुए सीमा पर जमकर गोलीबारी की जिसमें भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ा। इन घटनाओं को लेकर मोदी सरकार को काफी फजीहत का सामना भी करना पड़ा था। बाद में सरकार ने महबूबा के आग्रह को दरकिनार करते हुए पाकिस्तान की करतूत का मुंहतोड़ जवाब दिया।

ऑपरेशन आलआउट 
जम्मू-कश्मीर में बढ़ती आतंकी घटनाओं को लेकर अभी हाल में मोदी सरकार ने जवानों को दोबारा ऑपरेशन आल आउट शुरू करने का आदेश दिया था। लेकिन भाजपा सरकार का यह फैसला महबूबा मुफ़्ती को पसंद नहीं आया जिसकी वजह से दोनों के रिश्तों में दरार पड़ गई।

आम चुनाव में भाजपा को नुकसान का खतरा
हाल के दिनों में जम्मू कश्मीर के हालात और सीमा पर हो रही गतिविधियों को लेकर मोदी सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर बनी हुई हैं। वहीं पीडीपी लगातार सीजफायर और ऑपरेशन आलआउट जैसे कदम उठाने के विरोध में हैं। इसी वजह से भाजपा को अंदेशा है कि अगर वह पीडीपी का साथ देती है तो उसे भारी नुकसान उठाना पडेगा।

पत्थरबाजों के खिलाफ सख्ती नहीं
जम्मू-कश्मीर में सेना को लगातार पत्थरबाजों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। आतंकी भी इन्ही पत्थरबाजों को ढ़ाल की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बावजूद महबूबा सरकार इन पत्थरबाजों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठा रही थी, जो भाजपा को नागवार गुजरा और उन्होंने गठबंधन तोड़ने का फैसला लिया।

विफल रही महबूबा सरकार
भाजपा का मानना है कि सूबे में महबूबा सरकार की कार्यप्रणाली विफल रही है। जम्मू और लद्दाख के विकास में बीजेपी के मंत्रियों को अड़चनें आती रहीं। कई विभागों में काम के लिहाज से जम्मू और लद्दाख के साथ भेदभाव जनता महसूस करती रही।

 

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